पीएम मोदी ने वादा किया था अच्छे दिन आएंगे, इंसानों के तो अच्छें दिन आए। लेकिन अब दावा किया जा रहा है कि गायों के अच्छे दिन आ गए हैं। गोरक्षा के नाम हर आए दिन हत्याएं हो रही हैं। गायों के अच्छें दिन लाने के नाम पर सत्ताधारियों ने हत्या को समर्थन देना भी शुरू कर दिया है।

केंद्रीय मंत्री गाय के नाम पर हत्या करने वालों को फूल की माला भी पहना रहे हैं। बावजूद इसके गायें सुरक्षित नहीं हैं। क्यों? राजधानी दिल्ली के गोशाला में ही 36 गायों की मौत हो चुकी है। गोरक्षकों ने इन गायों की रक्षा क्यों नहीं की? क्या इससे ये साबित नहीं होता कि गोरक्षा के नाम पर कथित गोरक्षक सिर्फ आतंक फैला रहे हैं?

दिल्ली के छावला इलाके में स्थित गौशाला में पिछले दो दिन के भीतर 36 गायों की मौत हो चुकी है। इस गोशाला में डेढ़ से दो हजार गायों को रखा जाता है लेकिन उनके खानपान रखरखाव और स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रखा जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस गोशाला के नाम पर एमसीडी से अनुदान भी मिलता है।

एमसीडी में ‘गोरक्षक’ बीजेपी का शासन है। गोशाला में काम करने वाले एक वर्कर का कहना है कि ‘पिछले दो दिनों से पानी का मोटर खराब है। लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। हम इन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं। गोशाला में गायों के लिए कोई डॉक्टर नहीं है।’

नोट- तस्वीर प्रतीकात्मक है