भारतीय पत्रकारिता अब तक के सबसे निचले स्थान पर है। यही वजह है की पहले एक पत्रकार को एक चैनल से निकलवा गया। फिर जब वो पत्रकार दुसरे चैनल में जाता है कुछ ही महीने गुजरे ही थे अब उस पत्रकार को वहां से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

पुण्य प्रसून वाजपेई को ABP News से मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा है, अब सवाल है की क्या भारतीय TV मीडिया में वो ही आवाजें सुनाई देगी जो दंगें करवाने का दम रखती हो? रोज टीवी चैनलों की डिबेट में मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुसलमान से जुड़ी डिबेट दिखा दिखा दर्शकों को क्या दंगाई भीड़ में बदल दिया जायेगा?

पिछले कई दिनों से पुण्य प्रसून वाजपेई के प्राइम टाइम शो ‘मास्टरस्ट्रोक’ के दौरान सैटेलाइट से गड़बड़ी पैदा की जा रही थी। ऐसा नहीं है कि इस मामले सिर्फ वाजपेई लपेटे गए है उनके साथ साथ चैनल हेड मिलिंद खांडेकर को भी मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा है और पत्रकार अभिसार शर्मा को भी 15 दिनों के छुट्टी दे दी गई है।

ABP न्यूज़ ने इन सभी पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखाकर दर्शा दिया है, वही टिकेगा जो हिन्दू मुस्लिम करेगा। जिसे बेरोजगारी, महंगाई और अत्याचारों से कोई फ़िक्र नहीं होती जो सिर्फ हर मामले को हिंदू मुस्लिम की चश्मे से देखना और दिखाना पसंद करता है और कभी कभी तो पार्टी प्रवक्ता से गाली भी सुन लेता और मौलानाओं को स्टूडियो में बुलाकर मारपीट करवाता है।

अब वक़्त आ गया है मीडिया चैनलों को अपनी टैग लाइन बदलनी चाहिए। आपको रखे पीछे, दंगें फ़ैलाने में सबसे तेज इत्यादि इत्यादि। क्योंकि देश में अघोषित आपातकाल लगा दिया गया इससे डरने की ज़रूरत है क्योंकि ये लोकतंत्र की जड़ो को कमजोर करता है।