मोदी सरकार आने के बाद बैंकों का व्यवहार आम आदमी के प्रति बदल चुका है। सरकारी बैंकों में हज़ारों करोड़ का घोटाला तो उद्योगपति कर रहे हैं लेकिन बैंक जुर्माना आम नागरिक से वसूल रहे हैं।

बैंकों ने पिछले चार साल में आम आदमी के बैंक खातों से हज़ारों करोड़ रुपयें उड़ा लिए हैं। देश में 24 बैंक आम जनता के बैंक खातों से 11,500 करोड़ रुपियें जुर्माने के तौर पर काट चुके हैं।

ये बात शुक्रवार को वित्तीय मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि बैंकों ने 2014-15 से 2017-18 तक 11,500 करोड़ रुपियें मिनिमम बैलेंस के रूप में वसूले हैं। मतलब अगर आप अपने बैंक खाते में तय सीमा से कम पैसा रखोगे तो बचे कुचे पैसे भी काट लिए जाएँगे।

ये मामले पिछले साल भी गरमाया था। जब एसबीआई बैंक खाताधारकों पर इस तरह का जुर्माना लगाया हो। एसबीआई ने मिनिमम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों से 1771 करोड़ रुपये चार्ज के तौर पर वसूले थे।

मिनिमम बैलेंस के तौर पर वसूला गया यह चार्ज एसबीआई की उस साल की दूसरी तिमाही के नेट प्रोफिट 1,581.55 करोड़ रुपये से भी ज्यादा था।

बैंकों में इस तरह का पैसे काटने का माहौल बढ़ता जा रहा है। कुछ महीने पहले ही ग्राहकों की एक चूक से भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले 40 माह में 38 करोड़ 80 लाख रुपये की कमाई कर ली थी।

ये पैसे बैंक ने सिर्फ चेक पर हस्ताक्षर नहीं मिलने की वजह से खाताधारकों के खाते से कटे थे।। इतना ही नहीं सरकार ने इसपर जीएसटी लगाकर रकम को और बढ़ा दिया था।।