मोदी सरकार पर लगातार ये आरोप लग रहा है कि वो देश के हज़ारों करोड़ रुपयें लेकर भागे निरव मोदी और मेहुल चोकसी की मदद कर रही है। अब इस संबंध में एक और खुलासा सामने आए हैं।

‘द क्विंट’ की एक खबर के मुताबिक, अमेरिकी एजंसियों ने मई, 2018 में ही सीबीआई को “मेहुल भाई” के बारे में जानकारी दे दी थी। लेकिन उसके बाद भी सीबीआई कार्रवाई करने में नाकाम रही।

अमेरिकी एजंसियों ने सीबीआई को मेहुल चोकसी के अमेरिका में होने के बारे में सूचित कर दिया था। सीबीआई को उसके दो पतें भी दिए गए थे। इसके बावजूद सीबीआई ने अमेरिका को मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण याचिका यानि की उसे भारत को सौपने के लिए याचिका नहीं भेजी।

विपक्ष के नेताओं के खिलाफ कुछ दिनों में सबूत खोज लेने वाली सीबीआई को मेहुल चोकसी के खिलाफ अमेरिका पत्र भेजने में दो महीने का समय लग गया। मई, 2018 में सूचना मिलने के बावजूद सीबीआई का प्रत्यर्पण निवेदन पत्र अमेरिका 9 जुलाई, 2018 को पहुंचा।

एक कमाल का संयोग भी यहाँ हुआ। सीबीआई का निवेदन पत्र मेहुल चोकसी के एंटीगुआ पहुँचने के एक दिन बाद अमेरिका पहुंचा। निवेदन अमेरिका पहुँचने में कैसे दो महीने का समय लग गया इसे लेकर एजंसी के पास कई बहाने हैं लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं है।

ये भी बता दें, कि मेहुल चोकसी को एंटीगुआ का पासपोर्ट मिल गया है। उसकी मदद से वो अब विश्व में आराम से घूम सकता है। एंटीगुआ की सरकार ने बताया है कि मेहुल चोकसी को नागरिकता देने की अनुमति भारत सरकार ने मार्च 2017 में दी थी। जबकि उसके खिलाफ तब भी देश में कई मामले चल रहे थे।

अब सब कुछ हो जाने के बाद भारत सरकार ने एंटीगुआ से मेहुल चोकसी को भारत को सौपने के लिए प्रत्यर्पण निवेदन किया है। लेकिन दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण को लेकर कोई संधि नहीं है। इसलिए प्रत्यर्पण होना काफी मुश्किल नज़र आता है। और जिस देश के साथ संधि थी यानि की अमेरिका उसे सीबीआई ने प्रत्यर्पण निवेदन भेजने में दो महीनों का समय लगा दिया।

बता दें, कि पीएनबी बैंक में 13000 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी हैं। घोटाला सामने आने से पहले ही ये दोनों पूरे परिवार के साथ इसी साल जनवरी में देश छोड़कर भागने में कामयाब हो गए।

नीरव मोदी देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के रिश्तेदार हैं। मुकेश अंबानी को मोदी सरकार का करीबी माना जाता है। स्विटज़रलैंड के दावोस शहर में हुए वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की बैठक में नीरव मोदी को भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ देखा गया था।

इसके आलावा मेहुल पर 5,280 करोड़ रुपये के एक और बैंक घोटाले का आरोप है। सीबीआई आईसीआईसीआई बैंक के नेतृत्व में 31 बैंकों के एक कंसोर्टियम से मेहुल चोकसी और उनकी कंपनियों द्वारा 5,280 करोड़ रुपये के एक और लोन की जांच की जा रही है। ये मामला पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से अलग हटकर है।