भारत विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है। देश में 60 करोड़ लोग मतलब आधी से ज़्यादा आबादी 25 साल से कम उम्र की है। इसलिए रोज़गार इस देश की सबसे बड़ी ज़रूरत है लेकिन अब वो सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है।

वर्ष 2018 में रोज़गार के जो आकड़े आए हैं वो डराने वाले हैं। इस साल रोज़गार में 0% की वृद्धि हुई है। ये हम नहीं बल्कि सेंटर फॉर मोनिटरिंग ऑफ़ इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट कहती है।

सीएमआईई हर महीने 500,000 लोगों का इस सन्दर्भ में इंटरव्यू करता है। उसी के आधार पर उसने 7 जुलाई को अपनी रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मार्च 2018 तक अर्थव्यवस्था में एक भी नौकरी नहीं जुड़ी है। जिन लोगों को नौकरी मिली है वो वहीं लोग हैं जिन्होंने पहले की नौकरी छोड़ कोई दूसरी नौकरी शुरू की। लेकिन रोज़गार पैदा नहीं हुआ है।

रिपोर्ट बताती है कि रोज़गार पैदा होने की जगह नौकरियां खत्म हो रही हैं। पिछले साल 40 करोड़ 60 लाख लोग नौकरी कर रहे थे। लेकिन इस साल उनकी संख्या घटकर 40 करोड़ 20 लाख रह गई है।

ये आकड़े केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े करते हैं। नरेंद्र मोदी हर साल दो करोड़ रोज़गार देने के वादे पर सत्ता में आए थे। लेकिन अब रोज़गार ही उनकी सरकार के विरोध का सबसे बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

मोदी सरकार पर आरोप है कि वो युवाओं को रोज़गार की जगह ‘पकौड़ा’ दे रही है। रोज़गार के सवाल पर संसद में ईपीएफओ के ऐसे आकड़े पैश किये जा रहे हैं जो संदिघ्द हैं और जिनपर कई अर्थशास्त्री सवाल उठा चुके हैं।