राफेल विमान घोटाले के आरोपों में अब मोदी सरकार घिरती जा रही है। विमान के समझौते के बारे में अब नए खुलासे सामने आ रहे हैं। मोदी सरकार पर उद्योगोपति अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाने के आरोपों के बीच पता चला है कि अनिल अंबानी इस विमान की डील के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ फ़्रांस में मौजूद थे।

गौरतलब है कि संसद के मानसून सत्र में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर राफेल विमान को ज़्यादा दामों में खरीद अनिल अंबानी की कंपनी को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया था।

दरअसल, पुराने राफेल समझौते को ख़त्म कर जब नए समझौते के लिए प्रधानमंत्री मोदी अप्रैल 2015 में, फ़्रांस गए थे तब उनके साथ अनिल अंबानी भी थे। उसी दौरान पीएम मोदी ने एक इंडो-फ़्रांस सीईओ मीटिंग को भी संबोधित किया था। उसमें मोदी सरकार के करीबी माने जाने वाले दो उद्योगोपति अनिल अंबानी और गौतम अडानी मौजूद थे।

ये उसी समय अंग्रेजी अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के लेख का हिस्सा है। जिसमें बताया गया है कि उस मीटिंग में अनिल अंबानी भी मौजूद थे। इतना नहीं राफेल विमान बनाने वाली कंपनी डासौल्ट के चीफ एरिक ट्रेपियर के साथ बातचीत के दौरान भी अनिल अंबानी मौजूद थे। ये मीटिंग भी पीएम मोदी के फ़्रांस दौरे के दौरान ही हुई थी।

क्या है राफेल घोटाला?

राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अम्बानी को फायदा पहुँचाया है।

बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 526 करोड़ थी।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी ‘डासौल्ट’ के साथ मिलकर बनाती। 2015 में मोदी सरकार ने इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए 2016 में नई डील की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1670 करोड़ रुपये होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अम्बानी की कंपनी बनाएगी। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

अब मोदी सरकार का कहना है कि वो विमान कितने रुपये में खरीदा गया है इस बात को नहीं बता सकती है क्योंकि इस से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होगा। अब सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के आलावा सीक्रेसी क्लॉज का भी बहाना बना रही है।