पीएनबी घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी को लेकर अब मोदी सरकार सवालों में घिरती जा रही है। अब ये बात सामने आई है कि सरकार को महीनों पहले से उसके इरादों का पता था फिर भी उसने वक्त रहते सही कार्रवाई नहीं की।

दरअसल, मेहुल चोकसी ने भारत से भागने के बाद एंटीगुआ की नागरिकता ले ली है। अब उसपर शिकंजा कसना और भी मुश्किल हो गया है। इसके बाद जब एंटीगुआ पर मेहुल चोकसी को नागरिकता देने के लिए सवाल खड़े हुए तो उसने बताया कि मेहुल चोकसी के लिए भारत सरकार और उसकी एजंसियों ने क्लियारेंस दिया था।

एंटीगुआ का कहना है कि भारत सरकार से चोकसी के ख़िलाफ़ कोई सूचना नहीं थी। यहां तक की सेबी ने भी चोकसी के नाम पर मंज़ूरी दी थी। चोकसी के बैकग्राउंड की सख़्ती से जांच की गई, लेकिन उसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिला था।

अब विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शुक्रवार को बताया कि मेहुल चोकसी को एंटीगुआ में नागरिकता लेने के लिए मार्च 2017 में मंज़ूरी दी गई थी। यानि उसके भागने के 10 महीने पहले।

लेकिन अब सवाल ये उठता है कि जब सरकार को पता था कि उसी ने मेहुल चोकसी की एंटीगुआ नागरिकता को मंज़ूरी दी है। तो वो देश छोड़ने के बाद वहां जा सकता है, तो सरकार ने पहले ही कार्रवाई क्यों नहीं की।

मेहुल चोकसी जनवरी 2018 में देश छोड़कर भागा था। और एंटीगुआ का पासपोर्ट उसने पिछले महीने जुलाई में लिया। इस बीच वो अमेरिका में था। अगर सरकार चाहती तो एंटीगुआ से पहले ही बात कर उसको पासपोर्ट मिलने से रोक सकती थी।

यहाँ तक कि इसी साल अप्रैल में प्रधानमंत्री मोदी एक बैठक के दौरान एंटीगुआ के पीएम गैस्टन ब्राउने से भी मिले थे। लेकिन लगता है उन्होंने इस मुद्दे को एंटीगुआ के प्रधानमंत्री से बात करने के लिए महत्वपूर्ण नहीं समझा।

बता दें, कि पीएनबी बैंक में 14,356 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी हैं। घोटाला सामने आने से पहले ही ये दोनों पूरे परिवार के साथ इसी साल जनवरी में देश छोड़कर भागने में कामयाब हो गए।

नीरव मोदी देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के रिश्तेदार हैं। मुकेश अंबानी को मोदी सरकार का करीबी माना जाता है। स्विटज़रलैंड के दावोस शहर में हुए वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की बैठक में नीरव मोदी को भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ देखा गया था।

इसके आलावा मेहुल पर 5,280 करोड़ रुपये के एक और बैंक घोटाले का आरोप है। सीबीआई आईसीआईसीआई बैंक के नेतृत्व में 31 बैंकों के एक कंसोर्टियम से मेहुल चोकसी और उनकी कंपनियों द्वारा 5,280 करोड़ रुपये के एक और लोन की जांच की जा रही है। ये मामला पंजाब नेशनल बैंक घोटाले से अलग हटकर है।