मोदी सरकार देश की सरकारी कंपनियों को लगातार बेचने में लगी है। सत्ता में आने के बाद ये सरकार लगातार सार्वजानिक क्षेत्र वाली सरकारी कंपनियों को उद्योगपतियों के हाथों को सौपने में लगी है।

अब सरकार ने इस वित्त वर्ष (2018-19) की दूसरी तमही के लिए भी विनिवेश टारगेट तय कर लिया है। सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी नीजि कंपनियों को बेचने को विनिवेश कहा जाता है।

सरकार ने इस वित्त वर्ष के दूसरी तिमाही में 30 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा सरकार का दूसरी तिमाही में आईपीओ, बायबैक और ओएफएसएस के जरिए विनिवेश का लक्ष्य है।

सीएनबीसी आवाज़ की खबर के मुताबिक, पहली तिमाही में सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपये का विनिवेश किया है। इसके अलावा इस वित्त वर्ष में ओएनजीसी भी पवन हंस में अपनी 100 फीसदी हिस्सेदारी बेच सकती है।

बता दें, कि केंद्र सरकार 2017-18 में सरकारी कंपनियों को उद्योगपतियों को बेच 70 हज़ार करोड़ से ज़्यादा कमा चुकी है। और इस साल के लिए उसने 80,000 करोड़ का टारगेट रखा है।

इस तरह सरकारी कंपनियों में विनिवेश करना जनता के हित में नहीं है। क्योंकि नीजि हाथों में जाने के बाद मुनाफे की होड़ लग जाती है। इसके चलते इन सरकारी कंपनियों की वस्तुएं और सेवाएँ महंगी हो जाती है।