पीएनबी बैंक घोटाले के आरोपी मेहुल चोकसी को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। मेहुल चोकसी को अपनी नागरिकता देने के लिए जिस एंटीगुआ देश को कोसा जा रहा है, उसने बताया है कि ये कदम भारत की मर्जी से उठाया गया है।

बैंकिंग घोटाले के आरोपी और भगोड़े मेहुल चोकसी को नागरिकता देने पर एंटीगुआ सरकार ने सफ़ाई दी है कि भारत सरकार ने भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को क्लीन चिट दे दी थी उसके बाद ही उसे नागरिकता दी गई है।

एंटीगुआ का ये खुलासा मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। सरकार पर पहले ही नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की मदद करने के आरोप लग रहे हैं।

बता दें, कि पीएनबी बैंक में 14,356 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है। इस घोटाले में आरोपी हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चोकसी हैं। घोटाला सामने आने से पहले ही ये दोनों पूरे परिवार के साथ इसी साल जनवरी में देश छोड़कर भागने में कामयाब हो गए।

नीरव मोदी देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी के रिश्तेदार हैं। मुकेश अंबानी को मोदी सरकार का करीबी माना जाता है। स्विटज़रलैंड के दावोस शहर में हुए वर्ल्ड इकनोमिक फोरम की बैठक में नीरव मोदी को भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ देखा गया था।

एंटीगुआ का कहना है कि भारत सरकार से चोकसी के ख़िलाफ़ कोई सूचना नहीं थी। यहां तक की सेबी ने भी चोकसी के नाम पर मंज़ूरी दी थी। चोकसी के बैकग्राउंड की सख़्ती से जांच की गई, लेकिन उसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं मिला था।

एंटीगुआ की ओर से कहा गया है कि अगर भारत सरकार की ओर से मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण के लिये कहा जाता है तो यहां की सरकार उसके अनुरोध का सम्मान करेगी।

वहीं कांग्रेस ने पंजाब नेशनल बैंक के दो अरब डॉलर की धोखाधड़ी के मामले में फरार चल रहे हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी के एंटीगुआ की नागरिकता लेने को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा और दावा किया इससे सरकार की गंभीरता पर संदेह पैदा होता है।