कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के मुताबिक, उन्होंने बीजेपी को सरकार बनाने का मौका इसलिए दिया क्योंकि वह single largest party थी। राज्यपाल के इस तर्क के बाद उन तामम जगहों पर विपक्षी दल के नेता सरकार बनाने की मांग कर रहे हैं जहां वो single largest party थें।

जैसे गोवा में single largest party कांग्रेस थी लेकिन राज्यपाल ने सरकार बनाने का मौका बीजेपी को दिया, मेघालय में भी single largest party कांग्रेस थी लेकिन राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए बीजेपी को आमंत्रित किया। मणिपुर में भी single largest party कांग्रेस थी लेकिन राज्यपाल ने सरकार बनाने का मौका बीजेपी को दिया।

बिहार में नितीश कुमार के महागठबंधन से अलग होने के बाद सरकार गिर गई थी। सरकार बनाने के लिए दोबारा राज्यपाल के सामने बहुमत साबित करना था। single largest party लालू यादव की राजद थी लेकिन राज्यपाल ने सरकार बनाने का मौका जेडीयू और बीजेपी को दिया।

बिहार में single largest party यानी राजद को सरकार बनाने से रोकने वाले बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी कर्नाटक में single largest party की वकालत कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनता का भरोसा खोने वाली कांग्रेस सत्ता के लिए पिछले दरवाजे से जोर लगा रही है।

सुशील कुमार मोदी का इशारा कर्नाटक में बने कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को लेकर है। लेकिन सुशील कुमार को ऐसी बात शोभा नहीं देती क्योंकि बीजेपी और जेडीयू खुद बिहर में जनादेश के साथ धोखा करके सरकार चला रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन पर बीजेपी का सवाल खड़ा करना गलत है।

राज्यसभा सांसद और राजद नेता डॉ मीसा भारती ने सुशील कुमार पर निशाना साधते हुए लिखा है ‘जब ज़ुबाँ का साँप अपने ही अक्ल और विडम्बना को डस जाता है!”

मीसा भारती ने अपने दूसरे ट्वीट में देशभर के राज्यपालों पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा है कि ”आलीशान राजभवनों के रखरखाव, शानोशौकत और ऐशोआराम और सुरक्षा के नाम पर हर महीने करोड़ों करोड़ इसीलिए खर्च किए जाते हैं कि आदेश मिलते ही अपने आकाओं के लिए राज्यपाल संविधान की अवधारणा को ही मिनटों में मिट्टी में मिला दें।”

दरअसल राजद कहना है कि वो बिहार में single largest party पार्टी हैं फिर भी उन्हें सरकार बनाने का मौका नहीं मिला। अब कर्नाटक में single largest party की सरकार बनी है तो बिहार में भी बननी चाहिए।

राजद के इस तर्क पर सुशील कुमार मोदी का कहना है कि ”बिहार में जब चुनाव-पूर्व के महागठबंधन को 2015 में स्पष्ट बहुमत मिला था, तब राज्यपाल ने उसके पहले से घोषित नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाने में कोई देर नहीं की थी। जुलाई 2017 में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर गठबंधन टूटने से बनी विषम परिस्थिति में राज्यपाल ने विवेक-सम्मत निर्णय कर…”