मोदी सरकार पर पिछले कुछ समय से लगातार आरोप लग रहा है कि वो राष्ट्रवाद का ढोंग कर देश के रक्षा क्षेत्र और देश की सेनाओं को कमज़ोर कर रही है। अब ये बात संसद की एक समिति ने भी मान ली है।

सबसे बड़ी चीज़ ये है कि इस समिति के अध्यक्ष किसी विपक्षी पार्टी के नेता नहीं बल्कि एक समय प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शक रह चुके भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी हैं। इतना ही नहीं समिति में 16 भाजपा सांसद भी हैं। मोदी सरकार पर ये अबतक का सबसे बड़ा धब्बा है।

मुरली मनोहर जोशी ने कहा है कि मोदी सरकार आज देश के रक्षा क्षेत्र को उस स्तिथि में ले आई जैसी 1962 में चीन से हार के बाद उसकी थी।

‘सशस्त्र बलों की रक्षा – रक्षा उत्पादन और खरीद’ पर महत्व देते हुए समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार देश की राष्ट्रीय सुरक्षा की उपेक्षा कर रही है। ये भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

समिति ने तीनों सेनाओं के प्रमुखों से भी बात की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2018-19 के बजट में सरकार ने रक्षा क्षेत्र को जीडीपी का 1.6% हिस्सा दिया है। 1962 के बाद देश की रक्षा क्षेत्र को मिला ये जीडीपी का सबसे कम हिस्सा है।

समिति ने कहा है कि जब देश दो मोर्चों पर घिरा है। दूसरी तरफ हिन्द महासागर में भी उसे दबदबा बनाए रखना है। ऐसी स्तिथि में इतना कम बजट रक्षा को देना आलोचनात्मक है। समिति ने सिफरिश करते हुए कहा है कि रक्षा क्षेत्र को वर्तमान ज़रूरतों और भविष्य में हथियारों के आधुनिकरण के लिए प्रयाप्त बजट दिया जाए।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोदी सरकार आने के बाद देश के रक्षा क्षेत्र पर सरकार ने पूंजी व्यय प्रतिशत यानि सालाना खर्च कम कर दिया है। 2013-14 में तत्कालीन सरकार ने सालाना खर्च का 39% रक्षा क्षेत्र को दिया था। लेकिन अब 2017-18 और 2018-19 में इसे घटाकर क्रमश: 33% और 34% कर दिया गया है।