मोदी सरकार पर लगातार मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी ‘रिलायंस जिओ’ को फायदा पहुँचाने के आरोप लगते रहे हैं। और अब एक बार फिर से सरकार के हालियाँ कदम ने आरोपों की संख्या को बढ़ा दिया है। सरकार 5जी स्पेक्ट्रम के दाम कम कर मुकेश अंबानी को 5000 करोड़ रुपयें का फायदा पहुंचा सकती है।

देश में 4जी टेलिकॉम सेवा के बाद अब 5जी आने की तैयारी में है। सरकार 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी करने जा रही है। ताकि कम्पनियाँ एक-दो साल के अंदर ये सुविधा देना शुरू कर दें। लेकिन अचानक से सरकार ने स्पेक्ट्रम की कीमत कम कर दी है।

सरकार ने स्पेक्ट्रम की नीलामी के रिज़र्व मूल्य को घटाकर 6,568 करोड़ रुपयें कर दिया है। जबकि इसी स्पेक्ट्रम की नीलामी के दाम 2016 में 11,485 करोड़ रुपयें रखा गया था।

दरअसल, टेलीकॉम क्षेत्र में अब जिओ के आने के बाद प्रतिस्पर्धा बहुत ज़्यादा बढ़ गई है। इस वजह से बहुत सी कम्पनियाँ बंद होने के कगार पर आ गई हैं। आईडिया और वोडाफोन के विलय के बाद अब इस क्षेत्र में केवल एयरटेल, वोडाफोन-आईडिया लिमिटेड और रिलायंस जिओ ही बड़े खिलाड़ी के रूप में रह गए हैं।

रिलायंस जिओ ही ऐसी कंपनी बची है जिसके पास कुछ भी खरीदने के लिए प्रयाप्त संख्या में नकदी मौजूद है। एयरटेल और वोडाफोन आईडिया लिमिटेड दोनों ही भारी कर्ज़ में दबे हैं। तो इसलिए इस समय निलामी में पूरी सम्भावना है कि स्पेक्ट्रम जिओ ही खरीदेगी।

ये सभी बातें बाज़ार पर नज़र रखने वाले विश्लेषकों को पता हैं। मतलब सरकार भी इस सब से अनजान नहीं है। इसके बाद सरकार का स्पेक्ट्रम के दाम घटाने का ये कदम संदेह के घेरे में आता है।

पूर्व कैग प्रमुख विनोद राय की जिस 2जी घोटाले की थियोरी को भाजपा ने 2014 लोकसभा चुनाव का मुख्य हथियार बनाया था उसके मुताबिक भी, स्पेक्ट्रम का दाम घटाना सरकारी कोष के लिए नुकसानदायक है।

सरकार के इस कदम पर अब सवाल उठने शुरू ही गए हैं। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेता मनीष तिवारी ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि विनोद राय की थियोरी के मुताबिक, जब स्पेक्ट्रम के दाम घटाना घाटे का सौदा है तो सरकार ऐसा क्यों कर रही है।