चीन को लव लेटर न लिखकर करारा जवाब देने की सलाह देने वाले नरेंद्र मोदी की ही सरकार अब चीन के प्रेम में डूबी है। ये बात हाल ही में संसद में पेश हुए कुछ आकड़े बताते हैं।

एक तरफ भाजपा और उससे जुड़े संगठनों के कार्यकर्त्ता पूरे देश में आम जनता की दुकानों में इसलिए तोड़फोड़ करते हैं क्योंकि वो लोग चीन की वस्तुएं यहाँ बेच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मोदी सरकार चीन से हज़ारों करोड़ का आयात कर भारत में लोगों को बेरोजगार बना रही है।

वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री सी. आर चौधरी ने बुधवार को राज्यसभा में एक सवाल के लिखित उत्तर देते हुए बताया कि भारत ने 2017-18 में 25,209 करोड़ रुपियें के सोलर सेल (धूप से बिजली बनाने वाले यंत्र) का आयात किया। इसमें से 22,402 करोड़ रुपियें के सोलर सेल चीन से आयात किये गए थे।

मतलब कुल आयात का 89 प्रतिशत चीन से आया। उसी चीन से जिस पर चुनावी रैलियों में अपना तथाकथित राष्ट्रवाद दिखाने के लिए पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा निशाना साधा जाता है।

ये तब है जब संसदीय पैनल ही अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि इस कारण देश में लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हो रहे हैं। पिछले हफ्ते गुरुवार को संसदीय समिति ने कहा कि देश में चीन में बने सौर पैनलों की डंपिंग से करीब दो लाख रोज़गारों पर असर पड़ा है।

समिति ने वाणिज्य विभाग से अपनी जांच इकाई डंपिंग रोधी एवं संबद्ध शुल्क महानिदेशालय (डीजीएडी) के चीन से सस्ते आयात को रोकने के बारे में सुझावों को समुचित रूप से क्रियान्वयन करने को कहा है।