पिछले दिनों देश के एक बड़े न्यूज चैनल ने अपने संस्थान से एडिटर और एंकर को कथित तौर पर निकाल दिया। एडिटर का नाम मिलिंद खांडेकर और एंकर पुण्य प्रसून बाजपेयी। 3 अगस्त को ये मुद्दा संसद में उठा। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि पीएम मोदी की आलोचना करने की वजह से चैनल पर दबाव डालकर एडिटर और एंकर को हटाया गया।

खड़गे ने ये भी आरोप लगाया कि सेंट्रल हॉल में राज्यसभा के एक सांसद ने मीडिया को चैलेंज किया था कि हमारे हिसाब से नहीं चले तो चैनल बंद कर दिया जाएगा। लेकिन सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन राठौर ने मल्लिकार्जुन खड़गे के तमाम आरोपों को खारिज कर दिया।

राज्यवर्धन राठौर का कहना था कि जिस चैनल की बात हो रही है उसकी टीआरपी गिरती जा रही है। उसे कोई देखना ही नहीं चाहता था।

राज्यवर्धन राठौर के इस बयान को पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपने फेसबुक पोस्ट में गलत बताया है। पुण्य प्रसून बाजपेयी ने 6 अगस्त को इस पूरे प्रकरण के बारे में फेसबुक पर विस्तार से लिखा है। अपने इस पोस्ट में बाजपेयी ने तमाम चीजों का जिक्र करते हुए ये भी बताया है कि सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन का बयान कैसे गलत है।

उन्होंने लिखा है ‘मास्टरस्ट्रोक’ में एक्सक्लूसिव रिपोर्ट झारखंड के गोड्डा में लगने वाले थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर की गई। चूकि ये थर्मल पावर तमाम नियम कायदो को ताक पर रखकर ही नहीं बन रहा है बल्कि ये अडानी ग्रुप का है और पहली बार उन किसानों का दर्द इस रिपोर्ट के जरीये उभरा कि अडानी कैसे प्रधानमंत्री मोदी के करीब हैं तो झारखंड सरकार ने नियम बदल दिये और किसानों को धमकी दी जाने लगी कि अगर उन्होंने अपनी जमीन थर्मल पावर के लिये दी तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

बकायदा एक किसान ने कैमरे पर कहा, ‘अडानी ग्रुप के अधिकारी ने धमकी दी है जमीन नहीं दिये तो जमीन में गाड़ देंगे। पुलिस को शिकायत किए तो पुलिस बोली बेकार है शिकायत करना। ये बड़े लोग हैं। प्रधानमंत्री के करीबी हैं” और फिर खून के आंसू रोते किसान उनकी पत्नी।

और इस दिन के कार्यक्रम की टीआरपी बाकी के औसत मास्टरस्ट्रोक से चार-पांच प्वाइंट ज्यादा थी। यानी एबीपी के प्राइम टाइम [ रात 9-10 बजे ] में चलने वाले मास्ट्रस्ट्रोक की औसत टीआरपी जो 12 थी, उस अडानी वाले कार्यक्रम वाले दिन 17 हो गई।

यानी 3 अगस्त को जब संसद में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने मीडिया पर बंदिश और एवीपी चैनल को धमकाने- और पत्रकारो को नौकरी से निकलवाने का जिक्र किया तो सूचना प्रसारण मंत्री ने कह दिया कि, “चैनल की टीआरपी ही मास्टरस्ट्रोक कार्यक्रम से नहीं आ रही थी और उसे कोई देखना ही नहीं चाहता था तो चैनल ने उसे बंद कर दिया”।

तो असल हालात यहीं से निकलते है क्योंकि एबीपी की टीआरपी अगर बढ़ रही थी। उसका कार्यक्रम मास्टरस्ट्रोक धीरे धीरे लोकप्रिय भी हो रहा था और पहले की तुलना में टीआरपी भी अच्छी-खासी शुरुआती चार महीनो में ही देने लगा था [ ‘मास्टरस्ट्रोक’ से पहले ‘जन मन ‘ कार्यक्रम चला करता था, जिसकी औसत टीआरपी 7 थी। मास्ट्रस्ट्रोक की औसत टीआरपी 12 हो गई।