अगस्त की पहली तारीख, दिन बुधवार। मीडिया में कुछ खास खबरें नहीं चल रही थीं। लेकिन दोपहर के बाद कुछ ऐसा हुए जिसकी वजह से आजतक मीडिया में सनसनी फैली है। 1 अगस्त की दोपहर एबीपी न्यूज प्रबंधन ने एडिटर इन चीफ मिलिंद खांडेकर के इस्तीफे की घोषणा की।

थोड़ी ही देर में इस बात की भी घोषणा हो गई कि चर्चित शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ के एंकर और वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी ने भी चैनल से इस्तीफा दे दिया। इस घोषणा के बाद से तो सोशल मीडिया पर बवाल मच गया।

आरोप लगा कि मोदी सरकार पुण्य प्रसून बाजपेयी की आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पायी और उन्हें चैलन से निकलवा दिया। लोगों के इस संदेह को पुण्य प्रसून बाजपेयी ने आज हकिकत का जामा पहना दिया। उन्होंने 6 अगस्त को फेसबुक पर एक लंबी पोस्ट लिखकर पूरे घटनाक्रम को बताया है।

इस पोस्ट में बहुत सी बाते हैं। लेकिन इस खबर में हम आपको ये बताएंगे टीवी मीडिया में विज्ञापन दाताओं का कितना आतंक है। सरकार किस तरह विज्ञापन की मदद से चैनल को कंट्रोल कर रही हैं। पुण्य प्रसून बाजपेयी ने अपने पोस्ट में लिखा है…

‘भारत में न्यूज चैनलों के बिजनेस का सबसे बडा आधार विज्ञापन है। और विज्ञापन को मांपने के लिये संस्था बार्क की टीआरपी रिपोर्ट है। और अगर टीआरपी ये दिखलाने लगे कि मोदी सरकार की सफलता को खारिज करती रिपोर्ट जनता पंसद कर रही है तो फिर वह न्यूजचैनल जो मोदी सरकार के गुणगान में खोये हुये हैं। उनके सामने साख और बिजनेस यानी विज्ञापन दोनो का संकट होगा। तो बेहद समझदारी के साथ चैनल पर दवाब बढ़ाने के लिये दो कदम सत्ताधारी बीजेपी के तरफ से उठे…’

पुण्य प्रसून बाजपेयी ने बाबा रामदेव की कंपनी पंतजली पर आरोप लगाया कि वो मोदी सरकार के इशारों पर काम कर रही है। मोदी सरकार जिसे चाहती है पंतजली का विज्ञापन उसे ही मिलता है और जब चाहती है विज्ञापन रूकवा भी देती है।

उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा है ‘सबसे बड़ा विज्ञापनदाता जो विदेशी ताकतों से स्वदेशी ब्रांड के नाम पर लड़ता है और अपने सामान को बेचता है, उसका विज्ञापन झटके में चैनल के स्क्रीन से गायब हो गया। फिर अगली जानकारी ये भी आने लगी कि विज्ञापनदाताओं को भी अदृश्य शक्तियां धमका रही हैं कि वह विज्ञापन बंद कर दें।’

पुण्य प्रसून बाजपेयी आगे लिखते है ‘कमाल तो ये है कि इस्तीफा देकर निकले नहीं कि पतंजलि का विज्ञापन लौट आया। मास्टरस्ट्रोक में भी विज्ञापन बढ़ गया। 15 मिनट का विज्ञापन जो घटते घटते तीन मिनट पर आ गया था वह बढ़कर 20 मिनट हो गया। 2 अगस्त को इस्तीफा हुआ और 2 अगस्त की रात सैटेलाइट सिग्नल भी संभल गया।’