मोदी सरकार पर लगातार रोज़गार ना देने का आरोप लग रहा है। इस सवाल का सामना सरकार को देश के हर राज्य और हर समुदाय के बीच करना पड़ रहा है। तो इन सवालों से सवाल ये भी उठता है कि क्या सरकार के पास देने के लिए नौकरी नहीं है? क्या वो किसी मजबूरी के तहत ऐसा कर रही है?

इस सवाल का जवाब खुद संसद में पेश हुए आकड़े देते हैं। और इसका जवाब है ‘नहीं।’ संसद में बताया गया है कि केंद्र सरकार के हाथ में लाखों की संख्या में नौकरियां हैं लेकिन सरकार इनके लिए भर्ती नहीं कर रही है।

5 अगस्त को टाइम्स आफ इंडिया ने एक रिपोर्ट छापी। रिपोर्ट को फरवरी से जुलाई के बीच संसद में अलग अलग विभागों के संदर्भ में दिए गए आंकड़ों को एक जगह जमा कर बनाया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्र सरकार के पास अलग-अलग विभाग में लगभग 24 लाख पद खाली पड़े हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया के संकलन के मुताबिक, 10 लाख नौकरियां तो सिर्फ प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में हैं। अख़बार ने लिखा है कि पुलिस में पांच लाख 40 हज़ार वेकेंसी है। अर्ध सैनिक बलों में 61,509, सेना में 62,084, पोस्टल विभाग में 54,263, स्वास्थ्य केंद्रों पर 1.5 लाख, आंगनवाड़ी वर्कर में 2.2 लाख वेकेंसी है।

एम्स में 21, 470 वेकेंसी है। अदालतों में 5,853 वेकेंसी है। अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में 12, 020 वेकेंसी है। इन सबके अलावा रेलवे में 2.4 लाख नौकरियां हैं। जबकि इनमें से डेढ़ लाख पदों पर भी भर्ती नहीं निकली है।

वैसे तो हर साल भारतीय बाज़ार में एक करोड़ से ज्यादा युवा नौकरी के लिए आते हैं। और प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। लेकिन अब मोदी सरकार का रेकॉर्ड रोज़गार देने में बहुत ख़राब नज़र आ रहा है।

स्तिथि ये हो गई है कि सरकार लाखों खाली पद होने के बावजूद नौकरियां नहीं दे पा रही है। अब फिर एक नया सवाल खड़ा होता है कि ऐसा सरकार क्यों कर रही है? इसका संभावित जवाब ये है कि शायद अर्थव्यवस्था की स्तिथि जितनी भयावह नज़र आ रही है उस से भी ज्यादा ख़राब है।

सरकार नोटबंदी और जीएसटी के बाद बर्बाद हो चुकी अर्थव्यवस्था को संभाल नहीं पा रही है। और अब अन्तराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे के तेल के दाम का बढ़ना, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत गिरना और देश में निवेश लगातार घटना और विदेशी निवेशकों द्वारा पैसा निकालने ने सरकार के होश उड़ा दिए हैं।

इसलिए ही हर सवाल को हिन्दू-मुस्लिम में बाटने की कोशिश हो रही है और केन्द्रीय केबिनेट मंत्री मॉब-लिंचंग करने वालों को माला पहना रहे हैं। आखिर जनता को उलझाए रखने के लिए कोई मुद्दा तो चाहिए ना।