एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने मंगलवार को बयान जारी कर मीडिया की आवाज़ दबाने के लिए सरकार और कॉर्पोरेट की कड़ी निंदा की है। बिना नाम लिए ‘एबीपी न्यूज़ प्रकरण’ पर टिप्पणी करते हुए एडिटर्स गिल्ड ने चैनल के मालिकों से आग्रह किया है कि सरकार या दूसरी ताकतों के दबाव में आकर न झुकें।

एडिटर्स गिल्ड ने मंगलवार (8 अगस्त) को एक बयान जारी कर कहा कि पिछले कुछ दिनों में देखा गया है कि दो न्यूज़ चैनलों के पत्रकारों ने दावा किया कि उनके मालिकों ने सरकार की आलोचना वाले कंटेंट को हल्का करने का दबाव बनाया। जिसके चलते उन्हें चैनल से इस्तीफ़ा देना पड़ा।

पत्रकारों के स्वतंत्र कामकाज में हस्तक्षेप करने के लिए गिल्ड सरकार के सभी प्रयासों की निंदा करता है। चाहे वो सीधा दबाव हो या मालिकों के माध्यम से। मीडिया की आज़ादी पर हमला चिंताजनक है। इससे भी ज़्यादा चिंताजनक यह है कि हाल ही में उस टीवी प्रोग्राम के प्रसारण को बाधित किया गया जो सरकार की आलोचना कर रहा था।

गिल्ड ने कहा कि इस तरह का प्रयास मीडिया की आज़ादी के साथ ही लोकतंत्र पर भी हमला है। इसके साथ ही गिल्ड ने मांग की कि इस तरह की घटनाओं पर सरकार संज्ञान ले और जो इसके दोषी हैं उनके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए।

गिल्ड ने अपने बयान में मीडिया की आज़ादी पर हमले के लिए सरकार की निंदा तो की लेकिन अपने पूरे बयान में गिल्ड ने न तो ‘मास्टरस्ट्रोक’ का नाम लिया और न ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का। गिल्ड के इस बयान पर कई वरिष्ठ पत्रकारों ने कड़ा ऐतराज़ जताया है।

बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम न लिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्विटर के ज़रिए कहा, “एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया जिसका नाम नहीं लिया जा सकता उसको ताकतवर भी नहीं कहा जा सकता। आज भारतीय पत्रकारिता की यह हालत है”!

वहीं पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने ट्वीट कर लिखा, “डियर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया उन तीन पत्रकारों के नाम हैं। और आप ख़ुद को पीएम का नाम लेते हुए नहीं पाते। यह बयान मुझे दण्डवत करता है”।

ग़ौरतलब है कि गिल्ड के बयान में जिस प्रोग्राम के प्रसारण में बाधा की बात की गई है वो एबीपी न्यूज़ का ‘मास्टरस्ट्रोक’ था जिसके एंकर वरिष्ठ पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी थे। गिल्ड ने इशारों में मामले का ज़िक्र तो किया लेकिन न तो प्रोग्राम के कंटेंट पर बात की और न ही उस प्रोग्राम से जुड़े लोगों का नाम लिया।

बता दें कि पुण्य प्रसून वाजपेयी ने हाल ही में अपने प्रोगाम ‘मास्टरस्ट्रोक’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक प्रोग्राम में बोले गए झूठ का ख़ुलासा किया था। मास्टरस्ट्रोक में पिछले महीने कथित तौर पर ये साबित किया गया था कि किस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम में एक महिला से ग़लत तरीके से सरकार की झूठी उपलब्धियों की तारीफ़ करवाई गई।

इस प्रोग्राम के बाद बीजेपी चीफ़ अमित शाह ने एबीपी न्यूज़ को सबक सिखाने की धमकी दी और आखिकार मास्टरस्ट्रोक को बंद कर पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी को चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

By: Asif Raza