उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अपराधियों के खात्मे और यूपी को अपराधमुक्त बनाने के लिए सूबे में रिकॉर्ड एनकाउंटर करवा रही है। यूपी पुलिस के मुताबिक मार्च 2017 से लेकर अब तक 1142 मुठभेड़ हुई हैं, जिसमें 34 अपराधी मारे गए और 265 घायल हुए हैं।

यूपी पुलिस द्वारा किए जा रहे कई एनकाउंटरों पर सवाल भी उठ रहे हैं। जब सभी एनकाउंटर्स का रिकॉर्ड देखा गया तो हैरान करने वाली सच्चाई खुलकर सामने आई है।

मारे गए अपराधियों में अधिकतर पर गंभीर इल्जाम थे, लेकिन जब टीवी चैनल एनडीटीवी ने इसकी पड़ताल की तो यह दावा भी किया गया की कुछ मुठभेड़ फर्जी भी हो सकती हैं, क्योंकि कई FIR में पुलिस ने एक ही तरह की ‘मुठभेड़’ को दिखाया है। इसलिए कई मुठभेड़ों के फर्जी होने का शक जाता है।

FIR के मुताबिक मुठभेड़ों की सच्चाई-

बागपत में सुमित गुर्जर पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। उसपर कत्ल और डकैती के इल्जाम थे। मगर जब इसकी तह तक जाकर छानबीन की गई तो पता चला कि एनकाउंटर से पहले सुमित और उसके परिवार पर कभी कोई FIR दर्ज नहीं हुई है। यूपी पुलिस ने सुमित का एनकाउंटर करने के बाद उसपर 50 हजार का इनाम रखा और

जो उसपर मुक़दमे दर्ज किए गए वो एनकाउंटर से एक दिन पहले दर्ज किए गए थे। सुमित के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाया कि उसकी बुरी तरह पिटाई की गई थी और यह बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी सामने आई है। जब परिवार ने जाँच की मांग की तो उनपर रेप और डकैती के केस दर्ज कर दिया गया।

वहीं शामली में फुरकान का यूपी पुलिस ने एनकाउंटर किया। फुरकान पर कई केस दर्ज थे, मगर एनकाउंटर करने के बाद उसर 50,000 का इनाम रखा गया। फुरकान के पिता ने जब इसकी जांच की मांग की तो उनपर पुलिस ने चोरी का केस दर्ज कर दिया।

आजमगढ़ में बीते साल 3 अगस्त को पुलिस ने जयहिंद यादव को गोली मार दी यहाँ भी पुलिस की वही कहानी है। पुलिस के मुताबिक जयहिंद भाग रहा था इसीलिए उसका एनकाउंटर किया गया, पुलिस ने उसे 21 गोलियां मारी। लेकिन जयहिंद के पिता का कहना है कि उनकी आँखों के सामने उनके बेटे को पुलिस ने उठाकर उसका एनकाउंटर किया।

एनडीटीवी ने जिन 34 FIR की पड़ताल की तो उसमें 14 केसों में पुलिस की भाषा एक जैसी है, यानि इन केसों में एक जैसी कहानी पुलिस ने दिखाई है। “अपराधी मुठभेड़ में मारे जाने के समय अपनी बाइक या कार में थे, पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा तो उन्होंने गोली चलाई और जवाबी कार्यवाई में वो मारे गए।

वहीं 9 मामलों में अपराधी भाग निकले और उनका पता नहीं चला। 9 मामलों में परिवारवालों ने कहा कि ‘आरोपी’ पुलिस हिरासत में मारे गए और पुलिस ने उसे एनकाउंटर का नाम दे दिया, 7 मामलों में अपराधियों के शरीर पर पुलिस टॉर्चर के निशान मिले हैं, 4 मामलों में उल्टा परिवारवालों के खिलाफ भी मामला बना दिया गया।

हैरान करने वाली बात है कि सभी एनकाउंटर में पुलिकर्मियों के गंभीर या जानलेवा चोट का एक ही मामला मिला, दर्ज FIR के मुताबिक पुलिस वालों को हाथ या पैर में गोली लगी! पुलिस एनकाउंटर्स में मारे गए लोगों के परिवारवालों के बयान लेने के मामले में भी मामला संधिग्ध है। पुलिस ने बस एक ही परिवार का बयान लिया है।

नॉएडा में जीतेन्द्र यादव के फर्जी एनकाउंटर मामले में योगी सरकार और यूपी पुलिस सवालों के घेरे में है। यूपी के डीजीपी ओ.पी सिंह ने भी जीतेन्द्र यादव फर्जी एनकाउंटर पर यूपी पुलिस को लताड़ लगा चुके हैं। वहीं विपक्ष योगी सरकार पर एनकाउंटर की आड़ में जाति विशेष को टारगेट करने का आरोप लगा रहा है।