महाराष्ट्र में किसानों ने इस समय प्रदेश की भाजपा सरकार के होश उड़ा दिए हैं। अपने खेतों को छोड़कर लगभग 35000 किसान नासिक से 150 किलोमीटर पैदल चलकर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आ गए हैं।

किसान मुंबई में अपनी मांगों के लिए जमा हुए हैं। किसानों की मांग है कि उपज की लागत मूल्य के अलावा 50 प्रतिशत लाभ दिया जाए, सभी किसानों के कर्ज माफ किए जाएं, नदी जोड़ योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को पानी दिया जाए, वन्य ज़मीन पर पीढ़ियों से खेती करते आ रहे किसानों को ज़मीन का मालिकाना हक दिया जाए, संजय गांधी निराधार योजना का लाभ किसानों को दिया जाए, सहायता राशि 600 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह की जाए, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में किसानों की स्तिथि बहुत ख़राब है। राज्य में किसान आत्महत्या का आकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। 2014 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने पर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़कर देने का वादा किया था। 2014 के बाद अब 2019 के चुनाव आने वाले हैं लेकिन पीएम मोदी अपना वादा पूरा नहीं कर पाए हैं।

मामले को देखते हुए राज्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसान नेताओं को बातचीत का न्योता दिया है। किसानों का कहना है कि अगर बातचीत से कोई समाधान नहीं निकला तो वो राज्य की विधानसभा का घेराव करेंगे। बताया जा रहा है कि बच्चों की परीक्षा को देखते हुए किसानों ने 11 बजे के बाद प्रदर्शन का फैसला किया है।

वहीं राज्य की विपक्षी पार्टियों समेत राज्य सरकार में भाजपा की साझेदार शिवसेना ने भी किसानों को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। एनसीपी चीफ शरद पवार ने तो पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे और विधान परिषद में नेता विपक्ष धनंजय मुंडे को पार्टी की तरफ से मोर्चे में शामिल होने को कहा है। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चव्हाण, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे और शेकाप के जयंत पाटील ने किसानों को समर्थन देने की घोषणा की है।

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