उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण और उससे होने वाली मौतों के सरकारी आंकड़ों को मैनेज किया जा रहा है।

एक तरफ इस बीमारी से तड़पते हुए लोगों को अस्पतालों में बेड मिलने में दिक्कत आ रही है, तो दूसरी तरफ योगी सरकार पर आंकड़ों में कोरोना से हुई मौतों के साथ हेरफेर करने के आरोप लग रहे हैं।

मीडिया में ‘ऑल इज़ वेल’ का बिगुल बजाया जा रहा है, लेकिन ज़मीनी हालात इससे कोसों दूर हैं। उदाहरण के तौर पर, राज्य के बिजनौर जिला अस्पताल में एक महीने के भीतर 55 लोगों की मौत हो चुकी है।

‘हिंदुस्तान’ की ख़बर के अनुसार, बीते करीब एक महीने के दौरान जिला अस्पताल के आईसीयू में 55 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, ये स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने कोरोना मरीज़ थे।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिले में कोरोना संक्रमण के मामले घटे हैं। लेकिन अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज़ नहीं घटे हैं। जिला अस्पताल में इस्तेमाल होने वाले सभी 10 वेंटिलेटर लगातार क्रियाशील हैं।

देश के मीडिया में बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश कोरोना को दूसरी लहर पार कर गया है। लेकिन अंतराष्ट्रीय मीडिया, जैसे कि रायटर्स एजेंसी, में कुछ दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं।

प्रयागराज में गंगा किनारे रेत में कई लाशें दफ़न हैं। इनमें से कितनों को सरकारी आंकड़ों में जगह मिली, नहीं पता। लेकिन इनमें से कई को बिना इलाज अपनी जान ज़रूर गवानी पड़ी।

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