उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में लगातार हो रही हत्याओं का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। राजधानी लखनऊ में कमलेश तिवारी का मामला अभी सुलझा भी नहीं है कि, हत्या का ताजा मामला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जिले में पाण्डेयपुर इलाके में प्रॉपर्टी डीलर बलवंत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गयी है।

पिछले दिनों वाराणसी (Varanasi) में ही दंपत्ति की घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यूपी की ये हालत तब है जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) अपनी सरकार में कानून व्यवस्था की दुहाई देकर भूतपूर्व सपा की अखिलेश यादव की सरकार को कोसते नहीं थकते हैं।

वाराणसी में अशोक विहार कालोनी में रविवार देर रात रिटायर्ड डीआईजी सभाजीत सिंह के बेटे बलवंत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बलवंत सिंह बिल्डर थे और देर रात अपने सहयोगी के घर से लौट रहे थे। रास्ते में ही हमलावरों ने बलवंत को गोली मार दी। आरोप है कि बलवंत को उन्हीं के एक सहयोगी पंकज चौबे ने गोली मार हत्या की है।

उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में हर दिन किसी न किसी दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक या यूं कहें कि किसी की भी हत्या हो रही है। इसी जंगल राज के चलते बीजेपी नित योगी के राज में चल रहे फ़ेक एनकाउंटर,  हत्या, बलात्कार की घटनाओं को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिपण्णी में कहा कि, “हम यूपी सरकार से तंग आ चुके है, वहां जंगल राज है।”

पिछले ढाई साल के कार्यकाल में अपराधियों के एनकाउंटर को अपनी उपलब्धि बताने वाली योगी सरकार में झांसी के व्यापारी पुष्पेंद्र यादव के फेक एनकाउंटर मामले में भी लीपापोती कर रही है। इन घटनाओं के अलावा हापुड़ में एक किसान को पुलिस हिरासत में पीट-पीट कर मार डाला गया, इलाहाबाद और वाराणसी में दिन प्रतिदिन हत्याओं के सिलसिला चल रहा है।

बता दें कि बीते शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की दिनदहाड़े गला रेतकर हत्या कर दी गई। तिवारी के परिजनों ने योगी सरकार पर आरोप लगाया है की सबकी मिली-भगत से ही कमलेश तिवारी की हत्या हुई है।

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