फर्जी एनकाउंटर्स के मामले में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार अब घिरती जा रही है। मानवधिकार आयोग की ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो फर्जी एनकाउंटर के सबसे ज़्यादा मामले उत्तर प्रदेश से सामने आए हैं। यानी उत्तर प्रदेश फर्जी एनकाउंटर्स के मामले में टॉप पर है। वहीं दूसरे स्थान पर हरियाणा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के सभी राज्यों के मुकाबले फर्जी एनकाउंटर की शिकायतें सबसे ज़्यादा उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई हैं। आयोग ने पिछले बारह साल का एक आंकड़ा जारी किया था, जिसमें देश भर से फर्जी एनकाउंटर (Fake Encounter) की कुल 1241 शिकायतें आयोग के पास पहुंची थीं जिनमें 455 मामले यूपी पुलिस के खिलाफ थे।

हालांकि ये आंकड़े कोई चौंकाने वाले नहीं है, क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री का मानना है कि अपराध पर लगाम कसने के लिए एनकाउंटर्स ज़रूरी हैं। उन्होंने इसके लिए पुलिस को फ्री हैंड दे रखा है। वह खुले मंच से अपराधियों को ठोकने की बात भी कह चुके हैं। पुलिस उन्हीं के निर्देशों का पालन करते हुए आए दिन अपराधियों को पकड़ने के बजाए ठोकती नज़र आ रही है।

कई मामलों में तो पुलिस ऐसे लोगों को भी निशाना बना रही है, जिनका अपराध से कोई संबंध नहीं है। यूपी की बेलगाम पुलिस कभी आपसी रंजिश में किसी की जान ले रही है तो कभी वसूली न देने पर किसी बेगुनाह पर गोलियां बरसा दे रही है।

हाल ही में हुए झांसी एनकाउंटर (Jhansi Encounter) की बात करें तो यहां भी पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। आरोप है कि पुलिस ने वसूली न देने पर पुष्पेंद्र यादव (Pushpendra Yadav) पर गोलियां बरसा दीं। जिससे उसकी मौत हो गई।

हालांकि पुलिस का कहना है कि पहले पुष्पेंद्र ने पुलिस पर गोलियां चलाई थीं, जिसके जवाब में पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं। जबकि पुष्पेंद्र के बारे में उनके परिजनों का कहना है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में पुष्पेंद्र द्वारा पुलिस पर गोली चलाए जाने की बात पर यक़ीन करना मुश्किल है।

वहीं पिछले साल नोएडा से पुलिस द्वारा किए गए एक फेक एनकाउंटर का मामला सामने आया था। जब एक जिम संचालक को पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर ने आपसी रंजिश में गोली मार दी थी और बाद में उसे एनकाउंटर दिखा दिया गया था।