गोदी मीडिया के पत्रकार ‘कारसेवक’ की भूमिका में आ चुका हैं। बस गले में भगवा गमछा डाल लें तो सोने पर सुहागा हो जाए। निष्पक्षता बेचकर चूर्ण चाट चुके गोदी मीडिया के कार सेवक पत्रकार हर रोज जुबानी राम मंदिर बना रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट अयोध्या विवाद पर अगली सुनवाई तीन महीने बाद करेगा। 29 अक्टूबर को 3 मिनट की सुनवाई में मामले को अगले तीन महीने के लिए टाल दिया गया।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई समेत जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के. एम जोसफ की पीठ ने कहा कि ये मामला अर्जेंट सुनवाई के तहत नहीं सुना जा सकता है।

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अब मीडिया के कार सेवकों को तीन महीना बर्दाश्त नहीं हो रहा है। सत्ता की गुलामी में इतना अंधा हो चुके है कारसेवक पत्रकारों को अब सुप्रीम कोर्ट पर भी भरोसा नहीं है। ये चाहते हैं कि आज के आज राम मंदिर बन जाए।

कोर्ट की सुनावाई के बाद अभी तक सरकार की तरफ से राम मंदिर पर बिल लाने की बात नहीं कही गई है। लेकिन कार सेवक पत्रकार हर रोज अपने प्रोग्राम के माध्यम से अध्यादेश ला रहे हैं।

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आखिर क्यों इन्हें राम मंदिर की इतनी चिंता है? क्या राम मंदिर बनते ही देश की सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा?