पिछले कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) को खुला पत्र लिख शिकायत करने वाली 49 मशहूर हस्तियों पर राजद्रोह (Sedition) का केस दर्ज कर लिया गया है।

दरअसल लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) ख़त्म होने के बाद दलित-मुस्लिमों (Dalit-Muslim) पर होने वाले बढ़ रहें अत्याचार पर लगाम लगाने के लिए फिल्म निर्देशक अदूर गोपालकृष्णन और अनुराग कश्यप और अपर्णा सेन समेत 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा था।

इस चिट्ठी में सविंधान का हवाला देते हुए सबने लिखा कि अफसोस की बात है कि ‘जय श्री राम’ आज एक भड़काऊ नारा बन गया है। भारत के बहुसंख्यक समुदाय में राम का नाम पवित्र हैं। एक जनवरी 2009 से 29 अक्टूबर 2018 के बीच 254 धार्मिक पहचान आधारित हिंसा दर्ज की गई है। जबकि 2016 में दलितों पर अत्याचार के 840  मामले सामने आए हैं।

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पत्र में कहा गया है कि इन मामलों में मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा 62 प्रतिशत और क्रिश्चियन समुदाय के खिलाफ 14 प्रतिशत मामले देखे गए है। प्रधानमंत्री मोदी आपने संसद में लिंचिंग की निंदा की वो काफी नहीं है।

इसी शिकायत पर वकील सुधीर कुमार ओझा ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) सूर्य कांत तिवारी के आदेश के बाद ये FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि इन शख्सियतों के खिलाफ राजद्रोह की धारा लगाई गई है।

रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वकील सुधीर ओझा ने इस मामले पर कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) ने बीते 20 अगस्त को ही याचिका स्वीकार कर ली थी। मगर अब जाकर सदर पुलिस स्टेशन ने FIR दर्ज की है। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले वकील का आरोप है कि इन हस्तियों ने देश और प्रधानमंत्री मोदी के छवि ख़राब की है।

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वहीं इस मामले पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने की तरफ से कहा गया है कि FIR भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गयी है। इसमें राजद्रोह, उपद्रव करने, शांति भंग करने के इरादे से धार्मिक भावनाओं को आहत करने से संबंधित धाराएं लगाई गईं हैं।

वहीँ 49 मशहूर हस्तियों के खिलाफ राजद्रोह के तहत FIR दर्ज होने पर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के नेता और पूर्व सांसद जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) ने नाराज़गी जताते हुए लिखा- अपने देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी कोई बम नहीं फैंका था। #SeditionCase #MobLynching 

ये पहला मौका नहीं है जब इस तरह से सवाल पूछने वाले पर ही सवाल उठाया जा रहा है। इससे पहले भी कई ऐसे मामलें में जब किसी ने सवाल किया है तो उसे या तो गद्दार कहकर ख़ारिज कर दिया जाता है या फिर उसपर राजद्रोह का मुक़दमा लगा दिया जाता है।