उत्तर प्रदेश एटीएस ने बीते दिनों लखनऊ से दो अलकायदा आतंकियों को गिरफ्तार किया है। जिनके पास से प्रेशर कुकर बम, पिस्टल और इससे संबंधित अन्य सामग्री बरामद हुई है।

अलकायदा के दो आतंकियों के लखनऊ से पकड़े जाने के बाद योगी सरकार विपक्षी नेताओं के निशाने पर है।

दरअसल एक तरफ जहां पूरे प्रदेश में उत्तर प्रदेश के नंबर वन राज्य होने के पोस्टर लगाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ राज्य के सुरक्षा प्रबंध में इतनी बड़ी चूक होना एक बड़ा सवाल है।

इस मामले में पत्रकार दिलीप मंडल ने भाजपा को घेरा है। उन्होंने ट्वीट कर पूछा है कि “नोटबंदी से जिन आतंकवादियों की कमर टूट गई थी वे चुनाव वाले राज्यों में गिरफ़्तारी देने कैसे पहुँच जाते हैं? ये वर्तमान भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा रहस्य है। खासकर इनकी टाइमिंग तो मतलब ग़ज़ब की है।”

नोटबंदी की टूटी कमर वाले ये देशद्रोही एकदम परफ़ेक्ट टाइमिंग के साथ इलेक्शन से पहले बाहर निकल आते हैं और गिरफ़्तार हो जाते हैं।

गौरतलब है कि साल 2016 में मोदी सरकार द्वारा की गई नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बड़ी बातें कही थी। जिनमें से एक है कि नोटबंदी के जरिए भारत में आतंक फैलाने वाले आतंकियों पर रोक लगाई जा सकेगी।

ऐसे में खासतौर पर उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले राज्य में आतंकी संगठनों का सक्रिय होना सरकार के कई बड़े फैसले को शंका के घेरे में लाकर खड़ा करता है।

कई विपक्षी नेताओं का कहना है कि भाजपा अक्सर बड़े राज्यों में चुनाव से पहले धर्म के नाम पर राजनीति करती है।

इस बार उत्तर प्रदेश में राम मंदिर का मुद्दा भुनाया नहीं जा सकता। इसलिए राज्य में अन्य मुद्दों पर राजनीति की जाएगी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दलों द्वारा भाजपा को बेरोजगारी, गरीबी और कोरोना महामारी सामने आई बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर घेरा जा रहा है।

अब भाजपा भी जनता को अपने पाले में लेने के लिए राजनीतिक मुद्दों की तलाश कर रही है। जिससे लोगों में भाजपा की अच्छी छवि बनी रहे।

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