सरकार का विकास अब लोगों की जान का दुश्मन बन गया है। विकास के नाम पर सरकार सड़कों को चौड़ा कर रही है, लेकिन इस काम के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवज़ा देने में टालमटोली की जा रही है। सरकार की इसी टालमटोली से परेशान महाराष्ट्र के अकोला ज़िले में पांच किसानों ने खुदकुशी करने की कोशिश की।

इन किसानों में शामिल एक किसान की तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तारीफ़ भी कर चुके हैं। मोदी ने साल 2016 में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में नोटबंदी के बाद 42 वर्षीय मुरलीधर राउत के मानवीय कार्यों के लिए उनकी तारीफ की थी।

मोदी ने नोटबंदी के तुरंत बाद अकोला जिले के बालापुर तहसील में शेलाड गांव के निवासी मुरलीधर राऊत के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा था कि वह नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपए के पुराने नोट के साथ आने वाले भूखे लोगों, खासकर मुसाफिरों को खाना खिलाते थे।

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मोदी ने कहा था कि नोटबंदी के तुरंत बाद जिनके पास नगदी नहीं होती थी तो राऊत उन्हें होटल में पहले खाना खाने और बाद में कभी उसी रास्ते से गुजरने पर पैसा चुका जाने को कहते थे। एक अधिकारी ने बताया कि जिस जगह राऊत का होटल था, वह जमीन राजमार्ग चौड़ा करने की परियोजना के लिए ले ली गई थी।

मुरलीधर राऊत ने सोमवार की शाम चार अन्य किसानों मदन हिवरकार(32, कान्हेरी गवली), साजिद इकबाल शे. मोहम्मद (30, बालापुर), मो. अफजल गुलाम नबी (30, बालापुर) और अर्चना भारत टकले (30, बालापुर) के साथ अकोला के अतिरिक्त जिलाधिकारी के कार्यालय के सामने जहर पी लिया।

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इन किसानों की जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग को फोर लेन बनाने के लिए अधिग्रहित की गई है। अधिग्रहित जमीन का मुआवजा अन्य किसानों की तुलना में कम मिलने के कारण ये किसान सालों से सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं। 29 जुलाई को ही इन किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर खुदकुशी करने की चेतावनी दी थी।

एक अधिकारी ने बताया कि जिस जगह राउत का होटल था, वह जमीन राजमार्ग चौड़ा करने की परियोजना के लिए ले ली गई थी। फिलहाल पांचों किसानों का अकोला के एक अस्पताल में उपचार चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

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