मोदी सरकार (Modi Government) के दूसरे कार्यकाल में रेलवे में पहली निजी ट्रेन (Tejas Express) चल चुकी है। अब सरकार एक बार फिर दूसरी सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) का हिस्सा निजी कंपनी को बेचने की तैयारी में है। जिसके तहत सरकार बीपीसीएल में अपनी 53.3 फीसदी में से बड़ा हिस्सा किसी चुनिंदा भागीदार को बेचने का विचार कर रही है।

दरअसल बीते सोमवार को विनिवेश को लेकर कोर ग्रुप के सचिवों की अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में BPCL के अलावा दूसरी कंपनियों में भी हिस्सा बिक्री को मंजूरी दी गई थी। जी बिजनेस के अनुसार, BPCL में सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी मिल गई है। इसके अलावा NEEPCO, शिपिंग कॉरपोरेशन, टिहरी हाइड्रो में भी सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दी गई है। वहीं, कंटेनर कॉरपोरेशन (CONCOR) में 30 फीसदी हिस्सा बेचने को मंजूरी दी गई है।

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मीडिया रिपोर्ट अनुसार बीपीसीएल के विनिवेश से ईंधन के खुदरा बाजार में न केवल बड़ी हलचल हो सकती है, बल्कि इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष में 1.05 लाख करोड़ रुपए के विनिवेश का एक तिहाई लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिल सकती है।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, निजीकरण की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। इन कंपनियों में विनिवेश के बाद एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया में भी स्ट्रैटेजिक डिसइन्वेस्टमेंट भी संभव है। उदाहरण के लिए एक्सचेंजों के जरिए शेयर बिक्री में सरकार एलआईसी पर IPO-OFS के शेयर खरीदने का दबाव बनाती है।

ये पहला मौका नहीं है जब सरकार किसी सरकारी कंपनी पर अधिग्रहण का दबाव डाला हो। इससे पहले पिछले ही साल मोदी सरकार ने ओएनजीसी पर एचपीसीएल के अधिग्रहण के लिए दबाव डाला था। इसके बाद संकट में फंसे सरकार ने (IDBI) बैंक बैंक के लिए निवेशक नहीं मिलने पर सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में एलआईसी को बैंक का अधिग्रहण करने को कहा था।

पहले भी सरकार ने किया निजीकरण

मोदी सरकार ने इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (IDPL) और राजस्थान ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (RDPL) को बंद करने का फैसला किया था। इसके बाद हिंदुस्तान एंटीबायोटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड (बीसीपीएल) का निजीकरण करने का फैसला कर चुकी है।

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आज भी इन्हें आवश्यक पूंजी को संक्रमित करके और इस उद्देश्य के लिए अपनी विशाल संपत्ति का उपयोग करके लाभदायक बनाया जा सकता है। अब ऐसे में सिर्फ यही कहा जा सकता है कि सुस्त अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने का सिर्फ एक ही इलाज हो सकता है।

सरकार को चाहिए कि वो सार्वजनिक खर्च को बढ़ावा दे और सरकार के  बुनियादी ढांचे, कृषि और शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा दे। इससे ना सिर्फ अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा बल्कि ये रोजगार और आय उत्पन्न करेगा।