केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल एक कार्यक्रम में जीडीपी गिरावट पर बहाना तलाश रहें थे। उन्होंने सोचा कि ओला-उबर और ई रिक्शा के बाद आर्थिक मंदी का ज़िम्मेदार किसको बताया जाए तो उन्होंने मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को गुरुत्वाकर्षण (gravity) का आविष्कारक बता दिया जबकि ग्रेविटी की खोज करने वाले आइंस्टीन नहीं बल्कि आइजक न्यूटन थे।

इतना ही नहीं इसके बाद गोयल सफाई भी देने आए जो और भी उलझाने वाली थी। उन्हें इस बात का दुख है कि उनकी बातचीत के संदर्भ के बजाए उसकी एक लाइन से बात का बतंगड़ बनाया जा रहा है। मगर यहां भी पीयूष गोयल ने आइजक न्यूटन नाम नहीं लिया जिन्होंने ग्रेविटी की खोज की थी।

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गोयल के बयान पर सोशल मीडिया पर खूब मजाक बनाया गया। इस बयान पर राजद ने भी सोशल मीडिया पर लिखा- दरअसल संघियों की मानें तो आइंस्टीन ही वह सेब थे जो न्यूटन के सामने गिरा! शाखा के ज़हरीले समाज शास्त्र के सामने वास्तविक ज्ञान, विज्ञान या गणित की बिसात!

विश्व के सारे ज्ञान, विज्ञान और भक्तों के स्वामी! अब सभी पाठ्यक्रमों को बदला जाएगा! बताया जाएगा कि #Einstein को पूरे जीवन पता ही नहीं चल पाया कि उन्होंने ही गुरुत्वाकर्षण की खोज की है!।

राजद ने आगे लिखा- कोई आश्चर्य नहीं कि 2013 से एक भी भारतीय विश्वविद्यालय विश्व के सर्वोच्च 300 की सूची में नहीं! धर्मांध मनुवादी संघियों को VC बनाया गया जिनका शिक्षा से नाता नहीं; प्रोफेसर एमेरिटस का मतलब तक नहीं जानते! गैर सवर्ण छात्रों का शोषण व ABVP के गुंडागर्दी को बढ़ावा ही एकमात्र काम है!

बता दे कि ग्लोबल यूनिवर्सिटी की नई रैंकिंग में टॉप 300 में भारत की एक भी यूनिवर्सिटी को शामिल नहीं किया गया है। पिछले साल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बेंगलुरू (आईआईएससी) ने टॉप 300 की सूची में जगह बनाई थी लेकिन इस बार वो इससे बाहर है।

गोयल ने क्या कहा था

जब आप टीवी पर देखते है कि पांच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने जा रहें है देश की जीडीपी 12% होना चाहिए और है 5%या 6% इस गणित में मत जाईये क्योंकि मैथ ने आइंस्टीन को (gravity) ग्रेविटी खोजने में मदद नहीं की। अगर हम बने बनाए ढांचे पर काम करते रहगे तो मुझे नहीं लगता कि देश में कोई नया अविष्कार हो पायेगा।

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बता दें कि इससे पहले वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटो सेक्टर में आई मंदी पर अजीब गरीब बयान दिया था। उन्होंने कहा कि वाहन क्षेत्र में नरमी के कारणों में युवाओं की सोच में बदलाव भी है। लोग अब खुद का वाहन खरीदकर मासिक किस्त देने के बजाए ओला और उबर जैसी आनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाताओं के जरिये वाहनों की बुकिंग को तरजीह दे रहे हैं।