30 साल पुराने मामले में सजा काट रहे बर्खास्त आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट ने आज कोर्ट में पेशी दी। पेशी के दौरान उनकी पत्नी भी उनके साथ मौजूद रही। अहमदाबाद के सेशन कोर्ट में एक साल बाद दिखे पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की पहली तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही। भट्ट ने इस दौरान अपने लिए लड़ने वालों को शुक्रिया कहा, साथ ही परिवार का साथ देने के लिए ‘शुक्रिया’ कहा।

दरअसल संजीव भट्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखर विरोधी है और उनके कार्यकाल में उनकी सुरक्षा संभाल चुके है। उन्हें मौत के एक मामले में गुजरात के जामनगर की एक अदालत ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी। 1990 में दंगों के दौरान पकड़े गए एक आरोपी को जामखंभाडिया में संजीव भट्ट ने बुरी तरह से मारा था, जिससे कुछ समय बाद उसकी मौत हो गई थी।

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इस मामले में सेशंस कोर्ट ने संजीव भट्ट और पीआई प्रवीण सिंह झाला को 10 साल के कैद की सजा सुनाई गई थी। इसी सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी। मगर अबतक उन्हें बेल नहीं दी गई है।

इस तस्वीर पर कांग्रेस नेता और शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। इमरान ने लिखा- ग़ुरूरे वक्त तुझको बात इतनी कौन समझाये, वो सर झुक ही नहीं सकता जिसे कट जाना आता है!! वसीम बरेलवी

संजीव भट्ट साहब वक्त के बादशाह के सामने न झुकने की क़ीमत चुका रहे हैं, तस्वीर आज पेशी के दौरान की है।

बता दें कि संजीव भट्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ खुलकर बोलने के लिए चर्चा में रहे हैं। उन्होंने गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी का हाथ होने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा तक दिया था।

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भट्ट ने 14 अप्रैल 2011 को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा देकर आरोप लगाया था, ‘मोदी ने 27 फ़रवरी 2002 को एक बैठक में पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से कहा कि वे मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंदुओं को अपना ग़ुस्सा बाहर निकालने दें।