शाहजहांपुर के एसएस लॉ कॉलेज की छात्रा से बला त्कार करने के के आरोपी बीजेपी नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के समर्थन में अब महानिर्वाण अखाड़ा उतर गया है। महानिर्वाण अखाड़ा से चिन्मयानंद जुड़ा हुआ है। साधू-संतों ने यू टर्न लेते हुए संत समाज द्वारा उसके बहिष्कार के फैसले को न सिर्फ वापस लिया है बल्कि खुलकर चिन्मयानंद की मदद करने का भी ऐलान किया है।

चिन्मयानंद के समर्थन में संतों का कहना है कि, वह लोग न सिर्फ चिन्मयानंद को कानूनी मदद मुहैया कराएंगे, बल्कि समाज में उसकी ख़राब हुई हा जिसे हम ठीक करने की कोशिश करेंगे।

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यही नहीं साधू संतों की सर्वोच्च संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के मुखिया महंत नरेन्द्र गिरी का कहना है कि चिन्मयानंद साजिश का शिकार हुए हैं। उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है। अखाड़ा परिषद ने इस मामले में संतों की टीम से जाँच भी करवाई है और चिन्मयानंद का बयान भी लिया है। बता दें कि चिन्मयानंद के 43 वीडियो लीक हो चुके हैं जिसमें वो ‘नंगे’ होकर पीड़िता से मालिश करवा रहा है।

जबकि इस मामले में एसआईटी (SIT) की टीम जाँच कर रही है। लेकिन महंत नरेन्द्र गिरी के मुताबिक इस मामले में दस अक्टूबर को हरिद्वार में होने वाली अखाड़ा परिषद की बैठक में औपचारिक ऐलान करते हुए चिन्मयानंद की सहायता करने की रुपरेखा तय की जाएगी। नरेन्द्र गिरी ने आगे कहा, चिन्मयानंद ने अपने वकीलों पर भरोसा जताया है और कोई कानूनी मदद लेने से मना किया है। इसके बावजूद उन्हें जिस भी तरह की मदद की जरुरत होगी, वो सभी सहायता मुहैया कराई जाएगी।

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इस मामले पर समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता ऋचा सिंह ने कहा है कि, “एक व्यक्ति सनातन धर्म जोकि त्याग-तपस्या का प्रतीक है उसी पवित्र धर्म की आड़ में सनातन धर्म का अपमान करता साफ़-साफ़ नजर आ रहा है। पर संत समाज के लिए क्या चिन्मयानंद सनातन धर्म से भी बड़ा हो गया जो खुल कर साथ खड़े हो गए?”

सवाल ये उठता है कि जब इस मामले की जाँच विशेष जाँच दल (SIT) कर रही है तब चिन्मयानंद धार्मिक अखाड़ा परिषद का सहारा क्यों ले रहा है? क्या धर्म की आड़ लेकर चिन्मयानंद इस मामले को धार्मिक रंग देना चाहता है?