गुजरात से उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों का पलायन अभी तक जारी है। इस मामले में बीजेपी की सरकारें कुछ भी बोलने से बच रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी बिहारियों को भगाए जाने पर कुछ भी ना बोलने वालों में से एक हैं।

इस घटना के बाद नीतीश कुमार ने बस इतना कहा था कि, बिहार सरकार गुजरात सरकार से लगातार संपर्क में है डीजीपी और मुख्य सचिव नजर बनाए हुए हैं।

गुजरात से पलायन कर बिहार लौटे 20 हज़ार से ज्यादा लोगों पर चिंता जाहिर करते हुए बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के DNA पर तंज कसा है।

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तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर एक घटना का जिक्र करते हुए लिखा है- “गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बिहार बाढ़ राहत सहायता कोष में दी गई 5 करोड़ की राशि लौटाने वाले स्वयंभू स्वाभिमानी नीतीश कुमार जब 20 हज़ार बिहारियों को गुजरात से पीटकर भगाया गया तो चुप हैं। पीएम मोदी जी अच्छे ढंग से नीतीश जी का डीएनए पहचानते हैं तभी तो डीएनए ख़राब बताया था।”

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव के दौरान अपने एक बयान में नीतीश कुमार का डीएनए खराब बताया था। इस बयान के बाद बीजेपी और जेडीयू में जमकर तकरार हुई थी।

गौरतलब है कि नीतीश की चुप्पी का कारण उनके ग़लत कदम का नतीजा है. दरअसल, उनकी चुप्पी की इस कहानी के पीछे महागठबंधन का साथ छोड़कर भाजपा का हाथ थामना है।

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2014 के बाद बिहार में मजबूत हो रही भाजपा को हराने के लिए लालू प्रसाद यादव की ‘राजद’ के बैनर टेल 2015 में महागठबंधन का उदय हुआ। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद महागठबंधन की आंधी में भाजपा सिमट कर रह गई।

इस चुनाव में महागठबंधन को भारी बहुमत से सीटें मिलीं राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर आई। जेडीयू को कम सीट मिलने के बावजूद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनाए गए। लेकिन अचानक नीतीश कुमार ने महागठबंधन का साथ छोड़ते हुए भाजपा का दामन थाम लिया था।

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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की यही मजबूरी है कि वो बिहारियों को गुजरात से बेरोजगार करके भगाए जाने के बाद भी गुजरात की भाजपा सरकार को कुछ बोल नहीं पा रहे हैं। नीतीश कुमार ऐसे समय में चुप हैं जब बिहार के लोगों को उनकी सबसे ज्यादा जरुरत महसूस हो रही है।