जेडीयू और बीजेपी के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इसका सुबूत आज लोकसभा के पहले सत्र के पहले ही दिन तीन तलाक विधेयक के दौरान दिख गया। जब मोदी सरकार ने तीन तलाक पर का मसौदा पेश किया। सदन में जब इस मामले पर बहस चल रही थी तबी एनडीए की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड ने इस बिल का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया है।

दरअसल तीन तलाक बिल पर जेडीयू सांसद ललन सिंह ने इस बिल का विरोध करते हुए जेडीयू का पक्ष रखा। सिंह ने कहा कि यह कानून समाज में अविश्वास पैदा करता है, हम हमेशा से एनडीए में रहे हैं, लेकिन धारा 370, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर जैसे विवादास्पद मुद्दों पर हमारा विचार हमेशा से अलग रहा है।

इसके बाद उन्होंने जो कहा अगर यही बयान विपक्षी दलों में से किसी ने दिया होता तो बीजेपी जमकर हंगामा करती। मगर क्योंकि बिहार में जेडीयू और बीजेपी दोनों मिलकर सरकार चला रहे हैं तो उनके बयान पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई।

ललन सिंह ने लोकसभा में कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा था कि हम समुदाय के जन-जागृति के लिए काम करेंगे। ये समाज सिर्फ संविधान से नहीं चलता है, रीति-रिवाज, परंपरा से भी चलता है।

सियासी गलियारों में जेडीयू के रवैये पर पहले ही शक ज़ाहिर किया जा रहा था। इसीलिए पहले ये  कहा जा रहा था कि जेडीयू तीन तलाक बिल के विरोध में मतदान करेगी। हालांकि दूसरी जेडीयू ने डैमेज कण्ट्रोल करते हुए ललन सिंह समेत जेडीयू सांसदों के वॉक आउट कर अपना विरोध जता दिया है।

मगर इस वॉक आउट से ज्यादा ललन सिंह का ये बयान की जेडीयू धारा 370, समान नागरिक संहिता और राम मंदिर जैसे विवादास्पद मुद्दों पर बीजेपी पर अलग विचार रखती है। इससे एक बार फिर सबकी नज़रें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जा टिकी है। राजनितिक विश्लेषक तो ये भी कहने लगे की हो सकता की बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश बीजेपी से अलग हो सकते है।

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