उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही ख़ुद को गायों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध बताती हो, लेकिन हक़ीक़त ये है कि सूबे में प्रशासन की लापरवाही की वजह से सरकारी गौशालाओं में गायों की मौतें हो रही हैं।

ताज़ा मामला बांदा के अतर्रा की सरकारी कान्हा गौशाला से सामने आया है। जहां इलाज और पर्याप्त चारा न मिलने से एक साथ कई गायों की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि यहां पिछले चार दिनों में इलाज और चारे के अभाव में 13 गायों की मौत हो गई।

स्थानीय लोगों की मानें तो यहां प्रशासन की लापरवाही के चलते रोज़ाना 3-4 गायों की मौत हो रही है। इन लोगों के मुताबिक, एक महीने में यहां करीब 50 गायों की मौत हो चुकी है। हालांकि गौशाला इंचार्ज छोटेलाल पिछले 2 दिन में सिर्फ 5 गायों की मौत की बात स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने ये माना है कि इन 5 गायों की मौत इलाज न मिलने की वजह से हुई।

वहीं बीजेपी के स्थानीय नेता राकेश गौतम मेजर ने चार दिनों में 13 गायों की मौत की ख़बर की पुष्टी की है। उन्होंने बताया, “कान्हा गौशाला में करीब 416 आवारा गौवंश रहती हैं। जहां चारा-पानी की कमी के चलते भूख की वजह से पिछले चार दिनों में 13 गायों की मौत हो चुकी है। इनमें चार गायें सड़क दुर्घटना में घायल थीं और नौ गायों की मौत चारा-पानी के अभाव में हुई है।”

इस मामले में गौतम ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों ने बिना पोस्टमॉर्टम कराए ही शव दफना दिए हैं। बीजेपी नेता के इन आरोपों पर गोशाला इंचार्ज छोटेलाल ने कहा कि गोशाला में डॉक्टर बुलाने के बावजूद भी नहीं आते, जिसके चलते न गायों को इलाज मिल पाता है और न ही उनका पोस्ट मॉर्टम हो पाता है।