उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य और भारतीय जनता पार्टी की महिला नेता प्रियंवदा सिंह तोमर ने किसान आंदोलन और यूपी की योगी सरकार में भारी भ्रष्टाचार को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

इसी के साथ ही प्रियंवदा सिंह तोमर ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी है।

प्रियंवदा राज्य महिला आयोग की सदस्य के साथ साथ भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भी थी। उन्होंने यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के साथ ही भाजपा की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

प्रियंवदा ने कहा है कि भाजपा की सरकार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है. महिला अत्याचार बढ़़ता जा रहा है और महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है।

प्रियंवदा ने अपने इस्तीफे में किसान आंदोलन का भी जिक्र किया है। प्रियंवदा ने खुद को एक किसान परिवार की बेटी बताते हुए इस्तीफे में कहा है कि मैं एक किसान परिवार से आती हूं।

जिस तरह से पिछले 131 दिनों से अन्नदाता किसान अपने हक अधिकारों के लिए आंदोलन पर बैठे हुए हैं और 500 से ज्यादा किसानों ने अपने प्राणों की आहूति दे दी है और सरकार खामोश बैठी है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर भी प्रहार करते हुए प्रियंवदा ने कहा कि अन्नदाताओं के प्रति नरेंद्र मोदी और भाजपा की सरकार ने संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर दी है। मैं सरकार के इस रवैये से आहत हूं।

अपने इस्तीफे में प्रियंवदा ने यूपी में महिलाओं की हालत पर भी सवाल उठाए और योगी सरकार की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा किया।

प्रियंवदा ने कहा कि यूपी में आए दिन महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं सामने आती रहती हैं। वो यूपी राज्य महिला आयोग की सदस्य होने के बावजूद पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाने में स्वयं को असमर्थ महसूस करती हैं।

वहीं भाजपा संगठन पर भी उन्होंने महिला विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि भारतीय जनता पार्टी के अंदर महिलाओं की उपेक्षा होती है।

यूपी की योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रियंवदा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।

मैं ऐसी स्थिति में पद पर बनीं नहीं रह सकती। मैं क्षुब्ध होकर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता और सभी पदों से त्यागपत्र दे रही हूं। इसके साथ ही नैतिक मर्यादाओं का पालन करते हुए राज्य महिला आयोग के सदस्य पद को भी छोड़ रही हूं।

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