सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर और बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक़ को लेकर सुनवाई चल रही है। इस सुनवाई के दौरान पक्षकारों में शामिल निर्मोही अखाड़ा से जब कोर्ट ने पूछा कि क्या उनके पास इस विवादित जमीन के मालिकाना हक से जुड़े कोई दस्तावेज या राजस्व रिकॉर्ड हैं।

तो इस सवाल पर निर्मोही अखाड़ा के वकील ने जवाब दिया कि 1982 में उसके यहां एक डकैती हुई थी और इसमें सारे दस्तावेज चोरी हो गए। इस लिहाज से पक्षकारों में शामिल निर्मोही अखाड़ा ने कहा है कि उसके पास ‘राम-जन्मभूमि’ के मालिकाना हक से जुड़े कोई दस्तावेज नहीं हैं।

गौरतलब हो कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बेंच की अगुवाई वाली बेंच ने इसी महीने 6 अगस्त से सुनवाई शुरू की है, जो अब रोजाना चलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले से पहले इस मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा था मगर उससे हल नहीं निकला।

बता दें कि साल 2010 सितंबर महीने में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने, 2010 में अपने फैसले में अयोध्या की विवादित 2।77 एकड़ भूमि को तीनों पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बांटने का आदेश दिया था। उसके इस फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 अपीलें लंबित हैं।