जम्मू कश्मीर में लगे कर्फ्यू की वजह से मरीज़ो को इलाज और दवाइयों के लिए कितना संघर्ष करना पड़ रहा है, इस बात का मीडिया के सामने आकर ख़ुलासा करने वाले यूरोलॉजी के गोल्ड मेडलिस्ट डॉक्टर उमर सलीम अख्तर को हिरासत में ले लिया गया है।

दरअसल, श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजिस्ट डॉ. अख्तर ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस बात का दावा किया था कि राज्य में कर्फ्यू की वजह से मरीज़ो को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया था कि अगर हालात इसी तरह रहे तो कई लोग इलाज के अभाव में मर भी सकते हैं।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर में जीवन रक्षक दवाएं खत्म हो रही हैं और कर्फ्यू की वजह से नई खेप नहीं आ रही है। मीडिया में उनके द्वारा किए गए इस दावे के 10 मिनट बाद ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। हिरासत में लिए जाने के बाद से डॉ. सलीम की कोई ख़बर नहीं है।

बीबीसी उर्दू से बात करते हुए डॉ सलीम ने बताया था, मेरे एक मरीज को छह अगस्त को कीमोथेरेपी की ज़रूरत थी, लेकिन कर्फ्यू की वजह से वह 24 अगस्त को मेरे पास आया और हमारे पास कीमोथेरेपी की दवाईयां नहीं थीं। उन्होंने कहा कि एक और मरीज़ को दिल्ली से कीमोथेरेपी की दवाईयां मंगानी थीं लेकिन वह दवाई नहीं मंगा पाया। अब उसकी कीमोथेरेपी कब होगी यह नहीं कह सकते।

डॉ सलीम ने चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा था कि किडनी डायलिसिस के मरीज हफ्ते में केवल एक बार इलाज करा पा रहे हैं और कश्मीरी दवाईयां इसलिए नहीं खरीद पा रहे हैं क्योंकि एटीएम में पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा, अगर मरीज़ डायलिसिस नहीं करायेंगे गे तो वे मर जायेंगे। कैंसर के मरीज कीमोथेरेपी नहीं कराएंगे तो वे मर जायेंगे। जिन मरीजों का ऑपरेशन नहीं होगा, वे मर जायेंगे।

वहीं जम्मू कश्मीर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने दवाइयों की कमी की खबरों से इनकार किया है। विभाग का दावा है कि सरकार द्वारा स्वीकृत सभी दवाइयां सरकारी और निजी सभी दुकानों पर उपलब्ध हैं।

हालांकि, सरकार के दावे के उलट दो कश्मीरी मेडिकल पेशेवरों ने पिछले हफ्ते अलग-अलग दो खुले पत्र प्रकाशित करवाये थे जिनमें चेतावनी दी गयी थी कि कर्फ्यू के कारण मरीजों को आपातकालीन चिकित्सकीय सेवाएं नहीं मिल रही हैं क्योंकि दवाईयां नहीं हैं।

फोटो साभार- BBC