क्या आप जानते हैं ‘परिवारवाद’ की घोर विरोधी भाजपा में ज्ञात-अज्ञात कितने परिवार हैं? ऐसे में भाजपा के परिवारवाद की सच्चाई जानकार आपको फिर बीजेपी का परिवारवाद का खिलाफ आवाज उठाना ढोंग लगने लगेगा।

दरअसल, भाजपा पर कद्दावर नेता, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और हाल ही में राजस्थान के राज्यपाल पद से सेवानिवृत्त हुए कल्याण सिंह ने फिर से भाजपा परिवार का दामन थाम लिया।

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इस तरह से कल्याण सिंह भाजपा से राज्यपाल का सुख भोगकर फिर भाजपा में वापस लौटे हैं। भाजपा परिवारवाद की घोर विरोधी है! इसका एक उदहारण देखिए कि, कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह बीजेपी के टिकट पर एटा से सांसद हैं और कल्याण सिंह के पोते राजवीर सिंह योगी सरकार में राज्यमंत्री हैं।

इसी तरह से बीजेपी में ऐसे ढेरों नाम हैं जिनके नाम पर भाजपा में परिवारवाद फलफूल रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, छग के पूर्व मुख्यमंत्री रमण सिंह, पियूष गोयल जैसे नाम परिवारवाद की जीती जगती मिसाल हैं। मगर, बीजेपी जनता को हमेशा बताती है कि, समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह, आरजेडी में लालूप्रसाद यादव का परिवारवाद है। बीजेपी जनता को जो नहीं बताती वो है खुद बीजेपी का अपना परिवारवाद!

हालाँकि भाजपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसके पास एक ऐसी फैक्ट्री है जिसमें बाहर से आया सेकुलर,कांग्रेसी,परिवारवादी और भ्रष्टाचारी राष्ट्रवादी होकर निकलता है। यानि भाजपा में शामिल होने के बाद नेता के सभी पाप धुल जाते हैं। फिर वही नेता दूसरी पार्टियों पर परिवारवाद को लेकर हमले करता दिखाई देता है।

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इसी ‘भाजपा फैक्ट्री’ का नतीजा है कि भाजपा के लिए सिर्फ गांधी परिवार,लालू परिवार और मुलायम परिवार ही राजनीति में दुराचार के प्रतीक रह गए हैं। बीजेपी को लगता है कि कांग्रेस और अन्य दूसरी पार्टियों में नेता की सीट तय है।

मगर बीजेपी ने कांग्रेस की तर्ज पर अपने भीतर भी कहीं राज्य के स्तर पर, कहीं विधानसभा के स्तर पर, कहीं लोकसभा के स्तर पर तो कहीं संगठन के पदों के स्तर पर चाँदी के चम्मच के साथ पैदा हुए लोगों को बिठाना और जीतना शुरू कर दिया है। इस तरह परिवारवाद ने भाजपा के भीतर बहुत बड़ी जीत हासिल कर ली है।