सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को मोदी सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को दी गई याचिका में जो कुछ कहा है उससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है अलोक वर्मा पर कैसे दबाव बनाया गया कि वो पीएम मोदी द्वारा नियुक्त राकेश अस्थाना पर एक्शन न लें।

अपनी याचिका में उन्होंने साफ़ कहा है कि मौजूदा हालत में सीबीआई को ठोस कदम उठाने की ज़रूरत थी मगर सरकार को सही नहीं लगा।

सुप्रीम कोर्ट में दी गई याचिका में सीबीआई चीफ आलोक वर्मा ने कहा कि मोदी सरकार सीबीआई के कामकाज में हस्तक्षेप करती है। 23 अक्टूबर को रातोंरात रैपिड फायर के तौर पर सीवीसी और DOPT ने तीन आदेश जारी किए जबकि ये फैसला मनमाने और गैरक़ानूनी तरीके से लिया गया, इस फैसले को रद्द किया जाना चाहिए।

सीबीआई के स्वंतंत्र तरीके से काम करने को लेकर वर्मा ने याचिका में कहा कि मौजूदा हालत को देखते हुए सीबीआई को ज़रूरत है की वो स्वतंत्र और स्वायत्त बनाए रखे। याचिका में उन्होंने कहा कि वो उन सारे मामलों का विवरण दे सकते हैं जो मौजूदा हालत का कारण बने, ये बेहद संवेदनशील हैं।

वर्मा ने अपनी याचिका में नियमों को याद दिलाते हुए कहा कि अधिनियम के तहत सीबीआई का नया निदेशक बनाने के लिए प्रधानमंत्री के पास विपक्षी नेता और चीफ जस्टिस की सहमति होना ज़रूरी होती है। ऐसे कोई फैसला लिया गया है तो वो फैसला कानून से बाहर लिया गया फैसला जिसे रद्द करना चाहिए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई अब 26 अक्टूबर को करेगी जिसमें आलोक वर्मा ने मोदी सरकार के फैसले को चुनौती दी है।  वहीं इस मामले पर सरकार ने सफाई देते हुए कहा है कि ये फैसला सीवीसी ने लिया है इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है।