मोदी सरकार द्वारा देश में की गई नोटबंदी और GST अपना विकराल रूप दिखाने लगी है। लेकिन मोदी सरकार के मंत्री बावजूद इसके नोटबंदी और जीएसटी को अपनी कामयाबी बता रहे हैं। एक सच्चाई ये भी है कि, नोटबंदी का खामियाजा देश की अर्थव्यवस्था और जीडीपी (GDP) उठा रही है। जिसके कारण लाखों लोगों की नौकरियां तो गई हीं साथ ही हजारों बिज़नेस भी त बाह हो गए हैं।

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर शुक्रवार को दिल्ली में वाहन-कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों के संगठन एसीएमए को संबोधित कर रहे थे। तभी वहां मौजूद एक व्यवासायी ने अनुराग ठाकुर को टोकते हुए कहा कि, “नोटबंदी की वजह से वाहन क्षेत्र में मंदी छाई हुई है।”

अर्थशास्त्री अरुण कुमार का दावा- आज देश की GDP 5% नहीं 0% है और जिसकी वजह नोटबंदी-जीएसटी है

अनुराग ठाकुर ने व्यवसाइयों को संबोधित करते हुए सवाल किया कि, सरकार के उपायों, आरबीआई के हस्तक्षेप और विनिर्माताओं द्वारा दी जा रही छूट के बावजूद आखिर आखिर वाहन बिक्री क्यों नहीं बढ़ रही है? इसपर मौजूद एक प्रतिभागी ने तुरंत कहा कि, यह नोटबंदी का प्रभाव है।

लुधियाना के जीएस ऑटो के जसबीर सिंह ने वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर को बीच में टोकते हुए कहा, “यह नोटबंदी का देरी से सामने आने वाला प्रभाव है। लोगों के पास पैसा नहीं है, इसीलिए मांग नहीं बढ़ रही है।” इस समय तक असहज हो चुके अनुराग ठाकुर ने हालाँकि अपना भाषण जारी रखा और जसबीर सिंह को बार-बार धन्यवाद बोलते रहे! उन्होंने ये भी कहा कि, अगर यह नोटबंदी का देरी से सामने सामने आया प्रभाव है तो अब देखना है कि यहां से कैसे आगे बढ़ा जाए।

मोदीराज 2 : ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पहुंची बर्बादी के कगार पर, छिन सकता है 10 लाख लोगों का रोजगार

ठाकुर ने आगे कहा कि, रिज़र्व बैंक के हाल के कदम के बाद ब्याज की दरों में कटौती, कंपनियों द्वारा छूट की पेशकश और केंद्र सरकार की कई पहल के बावजूद आखिर उद्योग पहले की तरह मांग क्यों नहीं देख रहा।

ठाकुर ने सवालिया लहजे में पूछा- मांग में पूरी दुनियामे गिरावट आ रही है या फिर केवल स्थानीय स्तर पर ही इसमें गिरावट आ रही है? उन्होंने कहा, अन्य मुद्दा ये है कि लोग अब कैब का इस्तेमाल करने लगे हैं। उनके सामने एक और विकल्प इलेक्ट्रिक वाहन हैं। आखिर मुख्य कारण क्या है?