मोदी सरकार 2 के कार्यकाल की शुरुआत में ही अर्थजगत में जो सबसे बड़ी और सबसे अप्रिय खबर रही वो ऑटो सेक्टर से थी। खबर आने लगी की जगह जगह कर्मचारी बेरोजगार हो रहे है क्योंकि ऑटो सेक्टर पूरी तरह से बर्बादी की कगार पर है। यहां तक कि इस सेक्टर में महारथी माने जाने वाले टाटा मोटर्स की हालत भी अब ठीक नहीं है।

ये खबरें टीवी और अखबारों में तो वैसे जगह पाती नहीं है लेकिन अगर कहीं कवरेज पा भी जाती थी तो बीजेपी की तरफ से इनका खंडन किया जाता था। बीजेपी की आईटी सेल से अच्छे दिनों और विकास का सपना दिखाया जाता था।

कुमार विश्वजीत द्वारा की गई फ़ेसबुक पोस्ट से साभार

ऐसे ही सपने दिखाने की जिम्मेदारी झारखंड के बारीडीह के बीजेपी नेता कुमार विश्वजीत को मिली थी। वो बीजेपी आईटी सेल के जरिए सबको ‘मोदी का जलवा’ दिखाया करते थे। मोदी राज में सबका साथ और सबका विकास है, ये बताया करते थे।

 

लेकिन यही सब विश्वजीत अपने बेटे को नहीं बता सके, उसको यकीन नहीं दिला सके कि ‘सब कुछ अच्छा हो जाएगा’।
नौकरी चली जाने के डर से बेटे ने आत्महत्या कर ली।अब बेटे की आत्महत्या से व्यथित पिता ने खुद स्थानीय अखबार में स्वीकारा है कि हफ्ते भर पहले उसने नौकरी चले जाने का डर साझा किया था। कुमार विश्वजीत ने कहा कि उन्होंने आश्वासन दिया था कि सब ठीक हो जाएगा फिर भी बेटे ने आत्महत्या की राह चुनी।

जवान बेटा खो चुके एक अधेड़ उम्र के पिता को देखें तो बेशक हमदर्दी होती है लेकिन झूठे सपने बेच रहे एक नेता को देखें तो सवाल उठता है कि दुनिया को विकास का यकीन दिलाने वाले कुमार विश्वजीत अपने बेटे को यकीन क्यों नहीं दिला पाए। ‘अच्छे दिन आने वाले हैं’ कहकर दिनभर सोशल मीडिया पोस्ट करने वाले विश्वजीत अपने बेटे को ‘सब कुछ अच्छा हो जाएगा’ का आश्वासन क्यों नहीं दे सके।

ये घटना जहां एक परिवार के साथ हुई ट्रेजडी को दिखाता है वहीं राजनीति की विडंबना को भी दिखाता है कि जो सार्वजनिक स्तर पर सपने दिखाने का काम करते हैं उनकी बातों पर अपने भी यकीन नहीं करते । क्योंकि उन्हें पता होता है कि ये बातें महज राजनीतिक प्रोपेगंडा हैं।

दरअसल कुमार विश्वजीत के बेटे आशीष जिस कंपनी में काम करते थे वो कंपनी टाटा मोटर्स के लिए पार्ट्स बनाने का काम करती थी। इस तरह से वह अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, ऑटो सेक्टर की बर्बादी से अपनी नौकरी पर खतरा समझ रहे थे। उन्हें डर था कि किसी भी दिन उनकी नौकरी जा सकती है।