एक तरफ़ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) कन्याओं के साथ दुष्कर्म करने वालों के बचाव में खड़े नज़र आते हैं तो दूसरी तरफ़ वह दुर्गानवमी के मौके पर पूरे विधि-विधान के साथ कन्या पूजन (Kanya Pujan) करते दिखाई देते हैं।

वह सोमवार को कैमरों से लैस गोरखनाथ मंदिर (Gorakhnath Temple) पहुंचते हैं। 51 नन्हीं बच्चियों के पैर धोते हैं और फिर उन्हें टीका लगाकर, माला पहनाकर प्रसाद ग्रहण कराते हैं। जब सीएम योगी के ये सारे कर्मकांड कैमरों में हर एंगल से कैद हो जाते हैं, तब वह महिला सशक्तिकरण पर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता का बखान करना शुरु करते हैं।

वह कहते हैं कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ उनका नारा है। उनकी सरकार कन्याओं को सशक्त करने के लिए जल्द ही ‘कन्या सुमंगला योजना’ भी ला रही है।

डॉ कफ़ील कभी दोषी नहीं थे, उनको सज़ा सिर्फ़ उनके मुस्लिम नाम की वजह से दी गईः रोहिणी सिंह

सीएम योगी भले ही दुर्गानवमी के मौके पर कन्याओं को सशक्त करने के लिए अपनी सरकार को प्रतिबद्ध बता रहे हों, लेकिन हक़ीक़त ये है कि उनकी सरकार ज़्यादातर मौकों पर महिलाओं का उत्पीड़न करने वालों के साथ खड़ी नज़र आई है।

उन्नाव गैंगरेप कांड से लेकर शाहजहांपुर में लॉ की छात्रा से रेप के मामले तक में योगी सरकार को आरोपियों को संरक्षण देते देखा गया है। इन दोनों ही मामलों में आरोप बीजेपी के नेताओं पर लगे और सरकार इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने बजाए इनको बचाने के रास्ते तलाशती रही।

उन्नाव गैंगरेप के आरोपी बीजेपी के निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और शाहजहांपुर की लॉ छात्रा से रे प के आरोपी बीजेपी के वरिष्ठ नेता स्वामी चिन्मयानंद को सरकार की तरफ़ से मामले को दबाने की पूरी छूट दी गई। दोनों की गिरफ़्तारी गंभीर आरोपों के बावजूद काफी समय के बाद हुई।

योगी बोले- मुगलों की वजह से सुस्त हुई अर्थव्यवस्था, नेहरु के बाद मुग़लों पर ठीकरा फोड़ेगी BJP ?

चिन्मयानंद को तो सरकार अभी भी संरक्षण देती दिखाई दे रही है। चिन्मयानंद के खिलाफ पीड़िता के आरोपों के बावजूद रेप की धारा नहीं लगाई गई है। जबकि चिन्मयानंद के आरोप के आधार पर पीड़िता को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सीएम योगी के इसी दोहरे रवैये पर पत्रकार रोहिणी सिंह ने कन्या पूजन की तस्वीरों को ट्विटर पर शेयर करते हुए सरकार पर ज़ोरदार हमला बोला है। उन्होंने लिखा, “साल में एक दिन छोटी कन्याओं की पूजा करें और फिर चिन्मयानंद की रक्षा करें। क्या राजनेता ऐसा घृणित तमाशा बंद कर सकते हैं”?