जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के तीन दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम अपने संबोधन में कहा था कि अब देश के सभी नागरिकों के अधिकार समान हैं। उन्होंने कहा था कि पहले 370 की वजह से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के हमारे भाई-बहन अनेक अधिकारों से वंचित थे, लेकिन अब नहीं रहेंगे।

पीएम मोदी ने अपने इस ज़ोरदार बयान से भले ही ख़ूब वाहवाही लूट ली हो, लेकिन उनका ये दावा दिल्ली में उस वक़्त ग़लत साबित हो गया जब एक कश्मीरी युवक को उसकी पहचान की वजह से दिल्ली के एक होटल में रूम नहीं दिया गया।

दरअसल, सोशल मीडिया पर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्र मलिक आबिद ने दावा किया है कि उनके 24 वर्षीय कश्मीरी दोस्त, जो कि पेशे से डॉक्टर है, को दिल्ली के जसोला विहार स्थित एक होटल ने आधार कार्ड देखने के बाद रूम देने से इनकार कर दिया।

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आबिद ने बताया कि उसका दोस्त शनिवार को कश्मीर से दिल्ली किसी काम से आया था। आबिद ने कहा कि उसका दोस्त जामिया नगर में उसके किराए के फ्लैट पर उसके साथ रहने वाला था, लेकिन उसके फ्लैट पर पहले से ही कई लोग मौजूद थे, इसलिए उसके दोस्त ने एक होटल बुक करने का फैसला किया।

आबिद ने आगे बताया कि रात 9 बजे, उन्होंने अपने दोस्त के नाम पर OYO के फ्लैगशिप वाले होटल में एक रूम बुक किया और इसकी पुष्टि की। जिसके बाद वह और उसका दोस्त होटल गए और मैनेजर को बुकिंग की जानकारी दी। तब मैनेजर ने उसके दोस्त से पहचान पत्र मांगा।

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आबिद ने कहा कि उसके दोस्त ने तब अपना आधार कार्ड दिया, जिसमें उसका जम्मू-कश्मीर का पता था। जिसके बाद मैनेजर के भाव बदल गए और उसने किसी को कॉल किया। फोन पर उसने एक कश्मीरी को अनुमति देने के बारे में पूछा। दूसरी तरफ के व्यक्ति ने अनुमति देने से इनकार कर दिया।

मैनेजर ने कहा कि उन्हें कुछ व्हाट्सएप संदेश मिले हैं, जो स्पष्ट रूप से सरकार की ओर से हैं, जिसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने होटलों में अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। मैंने उस व्यक्ति से भी बात की जिसे मैनेजर ने फोन किया था और उसने भी वही बात कही।

वहीं इस बारे में जब OYO से बात की गई तो OYO के प्रवक्ता ने कहा, “हमने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। हम किसी भी प्रकार के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करते हैं और तत्काल सख्त कदम उठाएंगे, जिससे मालिकों के साथ अनुबंध  भी ख़त्म हो सकते हैं”।