प्रधानमंत्री मोदी ने 12 सितंबर को अपनी नई सरकार के 100 दिनों को लेकर झारखंड में कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता और प्रतिबद्धता है। हमने 100 दिनों में लोगों के कल्याण के लिए फैसले लिए हैं। यह महज शुरुआत है, 5 साल बाकी हैं। जिस तेजी से देश आगे जा रहा है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। मगर पीएम मोदी के इस बयान से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) इतेफाक नहीं रखता।

IMF का कहना है कि भारत की आर्थिक विकास दर उम्मीद से काफी कमजोर है। बीते बृहस्पतिवार को आईएमएफ ने कहा कि भारत की खस्ताहाल आर्थिक वृद्धि के लिए कॉर्पोरेट और पर्यावरण नियामक की अनिश्चितता और कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया है।

आईएमएफ के अनुसार, जुलाई में भारत के साल 2019 और 2020 धीमी विकास दर का पूर्वानुमान व्यक्त किया था। आईएमएफ ने भारत की अनुमानित विकास दर को 0.3 फीसदी कम किया था। वहीं आईएमएफ के अनुसार भारत की विकास दर साल 2019 में 7 फीसदी और साल 2020 में 7.2 फीसदी रह सकती है। घरेलू मांग को देखते हुए यह उम्मीद से कम है।

IMF प्रवक्ता गैरी राइस ने बीते गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हम विकास दर को लेकर नए आकड़े पेश करेंगे लेकिन भारत की मौजूदा विकास दर उम्मीद से काफी कम है। उन्होंने इसका कारण मुख्य रूप से कॉर्पोरेट और पर्यावरणीय नियामकों की अनिश्चितता और कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का कमजोर होना बताया है।

आईएमएफ प्रवक्ता ने कहा कि भारत के जीडीपी के आंकड़े से जुड़े सवाल के जवाब देते हुए कहा कि आईएमएफ भारत की विकास दर पर नजर बनाए हुए है। गैरी राइस ने कहा कि हम इस आकड़े को वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में अपने आकलन को अपडेट करेंगे।

इससे पहले मांग में कमी और गिरते निवेश के कारण देश की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती का असर जीडीपी के आंकड़ों पर भी देखने को मिलने लगा।

बता दें कि चालू वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट गिरकर ​महज 5 फीसदी रह गई है। जीडीपी किसी खास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है। भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर होती है। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये उत्पादन या सेवाएं देश के भीतर ही होनी चाहिए।

इससे पहले ​मार्च तिमाही में जीडीपी 5.80 फीसदी रही थी। जबकि पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही विकास दर 8 फीसदी दर्ज की गई थी। मौजूदा जीडीपी बीते 25 तिमाहियों मतलब कि पिछले 6 साल से अधिक वक़्त में ये सबसे कम जीडीपी ग्राथ रेट दर्ज की गई है।