मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिलने वाले स्पेशल स्टेटस को वापस ले लिया है। सरकार के इस फ़ैसले का जहां कई विपक्षी दलों ने समर्थन किया है, वहीं बिहार में एनडीए के सहयोगी जेडीयू ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है।

जेडीयू के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि हमारी पार्टी जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के नरेंद्र मोदी सरकार के फैसले के साथ नहीं है। हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं। हमारी पार्टी राज्यसभा में इस बिल का समर्थन नहीं करेगी।

उन्होंने कहा कि हमारे नेता नीतीश कुमार जेपी नारायण, राम मनोहर लोहिया और जॉर्ज फर्नांडिस के विचारों को मानते हैं। जेडीयू विवादित मुद्दों पर बीजेपी के साथ नहीं हैं। वहीं जेडीयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री श्याम रजक ने फैसले का विरोध करते हुए कहा कि आज का दिन हिंदुस्तान के लिए काला दिन है। आज संविधान की हत्या की गई है।

इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार का संकल्प पत्र पेश करते हुए कहा कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां विधानसभा के चुनाव होंगे। दूसरा लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां एलजी के हाथ में कमान होगी।

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर ने 17 नवंबर 1956 को जो अपना संविधान पारित किया था, वह पूरी तरह से खत्म हो गया है, यानी अब राज्य में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू होगा। जम्मू-कश्मीर को अब विशेषाधिकार नहीं मिलेंगे।

370 के तहत पहले जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। यानी वहां राष्ट्रपति शासन नहीं, बल्कि राज्यपाल शासन लगता था। अब वहां राष्ट्रपति शासन लग सकेगा। 370 हटने के बाद अब  बाहरी लोगों के जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीदने पर भी प्रतिबंध नहीं होगा।

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