जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद अब मोदी सरकार विपक्ष के तमाम नेताओं पर कहर बरपा रही है। पहले राज्यसभा में 370 हटाने का प्रस्ताव रखा गया, उसे पास भी करवाया गया और अब तमाम बड़े कश्मीरी नेताओं को गिरफ्तार किया जा रहा है।

खबर आ रही है कि महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है उन्हें गिरफ्तार करके श्रीनगर के सरकारी गेस्ट हाउस में ले जाया गया है।

इससे पहले भी रविवार को पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर उमर अब्दुल्ला को हाउस अरेस्ट यानी नजरबंद किया गया था ।

गौरतलब है कि अभी सरकार के इस फैसले पर महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला ने कड़ा एतराज जताया था और इसे कश्मीरियत पर हमला बताया था।

सवाल है कि अगर 370 के खत्म होने पर पूरा देश जश्न मना रहा है तो फिर कश्मीर में ये जश्न क्यों नहीं दिख रहा है ?कश्मीर के नेताओं से संवाद क्यों नहीं हो रहा है ? यहां तक कि कश्मीरियों को इंटरनेट और मोहन इस्तेमाल की बेसिक सुविधाएं भी क्यों नहीं दी जा रही है ?

जिनके वर्तमान और भविष्य का फैसला लिया जा रहा है उन्हीं की जिंदगी को कैदखाने में डालकर किस तरह के फैसले की वाहवाही की जा रही है ?

सरकार अगर कश्मीर को अपने देश का हिस्सा मान रही है तो कश्मीरियों को प्रताड़ित करके देश को कैसे मजबूत कर रही है ?