दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के चलते पिछले एक हफ्ते और आने वाले एक हफ्ते बेहद ही खतरनाक हैं। आने वाले कुछ दिनों में प्रदूषण और ज्यादा बढ़ने के आसार हैं इसीलिए सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए कड़े कदम उठा रही है।

इसी के मद्देनजर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री डॉ हर्षवर्धन द्वारा बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में दिल्ली समेत दिल्ली के पड़ोसी राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों को बुलाया गया था।

इस अति संवेदनशील बैठक में दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के पर्यावरण मंत्रियों को बुलावा भेजा गया था, जिन्हें लगातार ख़राब होते वातवरण पर चिंतन करके उपयुक्त कदम उठाने थे!

लेकिन यह जानकर हैरानी के साथ-साथ अफसोस भी होगा कि इतनी महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक में दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन को छोड़ कर किसी भी अन्य राज्य का पर्यावरण मंत्री बैठक में नहीं शामिल हुआ। यह तब है जब दिल्ली-एनसीआर की लगभग तीन करोड़ जनता ख़राब प्रदूषण से सीधे प्रभावित हो रही है।

इस स्थिति में ख़राब पर्यावरण से लाखों लोग गंभीर बीमारी के शिकार भी हो सकते हैं। मगर मंत्रियों को क्या इस बैठक से उन्हें वोट जो नहीं मिलना है। वोट मिने होते तो मंत्री जी एक पैर पर दौड़े चले आते!

केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने अन्य राज्यों के पर्यावरण मंत्रियों के बैठक में नहीं आने से नाराजगी जताते हुए कहा कि, “दिल्ली के अलावा बाकी राज्यों के मंत्री नहीं आए वह दूसरा मुद्दा है। हम इन राज्यों के अधिकारियों के साथ बात कर लेते हैं।”

बता दें कि इस बैठक के लिए दिल्ली को छोड़कर अन्य राज्यों से अधिकारी भेजे गए थे। हद्द तो तब हो गई जब बैठक में बुलाए गए राज्यों के मुख्य सचिव तो छोड़िए पर्यावरण सचिव भी नहीं आए। तो फिर जनता के लिए हमेशा तत्पर रहने वाले मंत्री जी जनता को लेकर कितना गंभीर हैं इसका अंदाज़ा सहज ही लगाया जा सकता है।

आपको बताना चाहते हैं कि, जिन राज्यों के मंत्री नहीं आए उनमें से वो राज्य भी हैं जहाँ पर भाजपा की असली तथाकथित ‘राष्ट्रवादी’ सरकार है। जो देश की रक्षा का ढिंढोरा पिटती है। यानि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा मंभ बीजेपी की राष्ट्रवादी सरकार है।

ऐसे समय में जब इतनी बड़ी संख्या में लोगों की सेहत पर बन आई है, तब मंत्रियों की ऐसी हरकत जनता के बीच नेताओं के लिए बनी आम धारणा को सच साबित करता है कि, “नेता किसी के नहीं होते”। इस हरकत के बाद मालूम पड़ता है कि इन नेताओं में इंसानियत नाम की चीज़ है भी या नहीं? इसपर फिर एक बैठक करके विचार करना पड़ेगा!

इस घटना पर पत्रकार विक्रांत यादव ने यूपी, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के पर्यावरण मंत्री के नहीं आने पर सोशल मीडिया पर तंज करते हुए लिखा है कि, “मंत्रियों के लिए सबसे पहले प्राथमिकता में है कि, मंदिर-मस्जिद, हिन्दू-मुसलमान और भी कई जरुरी मुद्दे हैं इनके सामने। प्रदूषण की बात करना इनके सामने बेईमानी है।”