हिंदुस्तान में जाति व्यवस्था सदियों से रही है और अभी भी समाज में कई रूपों में मौजूद है। इसी जातिवाद के दंश से पीड़ित एक बड़ा तबका विशेष उपचार की दरकार में रहता है जिस विशेष उपचार का नाम है आरक्षण।

लेकिन आरक्षण का बेवजह गलत इस्तेमाल करके कुछ लोग न सिर्फ लाभ ले रहे हैं बल्कि इसे बदनाम भी कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में एक ऐसा मंत्री है जो स्कूल में जनरल कटेगरी में था, कॉलेज में ओबीसी का हो गया और जब चुनाव लड़ना हुआ तो अनुसूचित जाति का हो गया! यानि ये मंत्री एक ही जन्म में तीन जाति-वर्गों का हो गया!

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की सरकारों और उनके नेताओं के एक-एक कर सामने आने लगे हैं जो उन्होंने अबतक बोले हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर अन्य नेता झूठ बोलते हैं! ऐसा सिर्फ हम नहीं कह रहे बल्कि नेताओं के दावे कह रहे हैं।

बीजेपी का एक बड़ा और नया झूठ सामने आया है।

भाजपा कोटे से फिरोजाबाद के टुंडला से विधायक हैं एसपी सिंह बघेल। बघेल ने टुंडला सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और बसपा के प्रत्याशी को 50 हज़ार मतों से मात दे दी। नोट करने वाली बात ये है कि सुरक्षित सीट का मतलब हुआ या तो एससी होगा एसटी।

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एसपी सिंह बघेल ने भी चुनाव आयोग को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र दिया। मगर, जो प्रमाणपत्र बघेल चुनाव आयोग को दिया वो फर्जी निकला। जब ये मामला सामने आया तो एसपी बघेल के और भी कई झूठ सामने आ गए जो उन्होंने दस्तावेजों में बोले हैं।

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने ट्वीट करते हुए इसके बारे में जानकारी दी है- योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री एसपी बघेल सुरक्षित सीट से लेकिन फर्जी दस्तावेज से भाजपा के टिकट से चुनकर मंत्री बने। लेकिन उन्होंने स्कूल में मूलतः अपने आपको ठाकुर जाति का घोषित किया है। फिर बाद में बघेल अन्य पिछडा वर्ग (OBC) का सर्टिफिकेट दिखाकर सरकारी नौकरी करते रहे! अब उनको हाईकोर्ट का नोटिस मिला है।

जिस भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप में आरक्षण का विरोध किया है अब उसी पार्टी ने फर्जी तरीके से, वो भी आरक्षित कोटे से आए विधायक को अपनी सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद दिया है। मामला सामने आने के बाद योगी सरकार इसपर कुछ बोलने से बच रही है।

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