हाल ही में हुए 5 विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद सवाल उठने लगे थे कि क्या बीजेपी 2014 जैसा प्रदर्शन 2019 में दोहरा पायेगी ?

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में मजबूत हुई कांग्रेस ने भाजपा की सिरदर्दी बढ़ा दी थी।अब भारतीय जनता पार्टी को सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश से लगा है जहां पर लगभग तीन दशकों की सबसे मजबूत जनाधार वाली पार्टियाँ सपा और बसपा ने गठबंधन कर लिया है।

सपा और बसपा के साथ रालोद और अन्य दलों के साथ आने की बात की जा रही है।

इस महागठबंधन के बनने का मतलब है भाजपा के लिए 2019 की राह लगभग नामुमकिन हो जाएगी क्योंकि सपा और बसपा का ही वोट प्रतिशत जोड़ दिया जाए तो भाजपा यूपी में अधिकतर सीटें हार जाएगी।

हालांकि गठबंधन का औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है कहा जा रहा है कि 15 जनवरी को गठबंधन की औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि मार्च 2018 से एक दूसरे को समर्थन दे रही सपा और बसपा ने 2019 के पहले का ट्रेलर दिखा दिया है।

फूलपुर, गोरखपुर और कैराना में सपा और रालोद उम्मीदवारों की जीत हुई है और भाजपा तीनों लोकसभा सीट हार गई है। इसके साथ ही नूरपुर विधानसभा में सपा उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।

पिछले 9 महीने में एक बात स्पष्ट हो गई है कि महागठबंधन बनने के बाद भाजपा के लिए एक भी सीट जीतना बेहद मुश्किल हो गया है।

वोट प्रतिशत के आंकड़े देखें या फिर जातीय समीकरण भाजपा का यही हश्र होगा अगर उसके सामने महागठबंधन पड़ता है तो बीजेपी की हार लगभग तय हो जाती है।

2014 के चुनाव में 80 में से 71 सीटें भारतीय जनता पार्टी को मिली थी। सपा-बसपा-रालोद व अन्य दलों की गठबंधन से बने समीकरण के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी को कम से कम 50 सीटों का नुकसान होगा। यानी 2019 में BJP सिर्फ यूपी में 60 सीटें हार सकती है। 

कम से कम 50 सीटों का ये एक बड़ा नुकसान झेलने के बाद भारतीय जनता पार्टी किसी भी कीमत में 2019 का चुनाव नहीं जीत सकती है क्योंकि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जितना वापसी करेगी, भाजपा को उतना नुकसान होगा। यानी इन राज्यों में भी भाजपा का नुकसान होना तय है।