राज्यसभा

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने धारा 370 हटाए जाने के मोदी सरकार के फैसले का विरोध किया है। राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि हमने कश्मीर के फिलीस्तीन बनने का रास्ता खोल दिया है।

मनोज झा ने सदन में जय प्रकाश नारायण की चिट्ठी का जिक्र भी किया जो उन्होंने कश्मीर के संबंध में इंदिरा गांधी और जवाहर लाल नेहरू को लिखे थे। उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला संवैधानिक इतिहास की हत्या है। हमें आज ये तय करना होगा कि हमें कश्मीरी चाहिए या फिर कश्मीर की ज़मीन।

उन्होंने कहा, ‘सिर्फ हाथ छोड़कर विनती करता हूं कि अंहकार छोड़िए और कश्मीरियों को गले लगाइए। पांच साल बाद कहा जाएगा कि सदन में कुछ लोग थे जिन्होंने अपनी सरकार को आगाह किया था।’

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इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर को लेकर सरकार का संकल्प पत्र पेश करते हुए कहा कि कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटा दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां विधानसभा के चुनाव होंगे। दूसरा लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां एलजी के हाथ में कमान होगी।

ग़ौरतलब है कि मोदी सरकार के इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर ने 17 नवंबर 1956 को जो अपना संविधान पारित किया था, वह पूरी तरह से खत्म हो गया है, यानी अब राज्य में भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू होगा। जम्मू-कश्मीर को अब विशेषाधिकार नहीं मिलेंगे।

370 के तहत पहले जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति के पास राज्य सरकार को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं था। यानी वहां राष्ट्रपति शासन नहीं, बल्कि राज्यपाल शासन लगता था। अब वहां राष्ट्रपति शासन लग सकेगा। 370 हटने के बाद अब  बाहरी लोगों के जम्मू-कश्मीर में संपत्ति खरीदने पर भी प्रतिबंध नहीं होगा। राज्य में पहले अल्पसंख्यकों को आरक्षण नहीं मिलता था, अब अल्पसंख्यकों को आरक्षण मिलेगा।

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