मोदी सरकार की शुरुआत में ‘अच्छे दिन आयेगें’ के नारे लगाए गए। मगर वो नारा धीरे धीरे बुरे दिनों में बदलता जा रहा है। सरकार की नीतियों में बदलाव की वजह से पहले ही रियल स्टेट कारोबार में सुस्ती थी। अब इसी सुस्ती के चलते गुजरात के सूरत के टॉप बिल्डर कहे जाने वाले हरेश सावजी रवाणी ने कर खुदकुशी ली है।

दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो हरेश पिछले कुछ समय से आर्थिक तंगी से परेशान थे। परिवार वालों ने बताया कि जीएसटी और नोटबंदी के कारण बिल्डरों को काफी नुकसान हुआ है। मंदी के कारण कई प्रोजेक्ट में रुपए फंसे हुए हैं। जो सबसे बड़ी वजह बनी उनके आत्मह त्या करने की। हरेश के परिवार वालों ने ये भी बताया कि काफी समय से डिप्रेशन में थे।

आ गई मंदी! सूरत में 200 हीरा कारीगरों को नौकरी से निकाला गया, मालिक बोले- काम नहीं है

रवाणी डेवलपर ग्रुप के संस्थापक 46 वर्षीय हरेश रवाणी शहर के टॉप 5 बिल्डरों में गिने जाते थे। इस ग्रुप ने शहर में कई बड़ी रेजिडेंशियल और कमर्शल परियोजनाओं का निर्माण किया है। रवाणी के छोटे भाई विनोद ने पुलिस को बताया कि अचानक ब्लड प्रेशर काफी हम हो जाने के कारण 20 दिन पहले ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। रवाणी के परिवार में दो बेटे है और पत्नी है।

परिजनों ने ये भी बताया कि सोमवार सुबह करीब 10 बजे किसी साइट पर जाने के लिए रवाणी ऑफिस से निकले थे। दोपहर करीब 12.30 बजे रवाणी के भाई विनोद ने उन्हें फोन पर बताया था कि शाम 4 बजे डॉक्टर को दिखाना है, इसलिए वह तैयार रहें। हरेश ने विनोद से कहा भी था कि उन्हें याद है और वह अस्पताल समय से पहुंच जाएंगे।

अर्थशास्त्री अरुण कुमार का दावा- आज देश की GDP 5% नहीं 0% है और जिसकी वजह नोटबंदी-जीएसटी है

विनोद जब वेसु स्थित साइट पर पहुंचे तो मालूम चला कि यहां रवाणी आए तो थे लेकिन वह जल्दी निकल गए थे। रवाणी का परिवार जानता था कि साइट से निकलने के बाद वह आराम करने के लिए फॉर्म हाउस पर ही जाते हैं। इसके बाद विनोद फॉर्म हाउस के लिए निकले। अभी वह रास्ते में ही थे कि फॉर्म हाउस के एक कर्मचारी ने जानकारी दी कि रवाणी ने पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली है।